सावधान ! आंखों की रोशनी का ‘मौन चोर’ है ग्लूकोमा, समय पर जांच ही एकमात्र बचाव
ग्लूकोमा अवेयरनेस वॉक: दृष्टि आई हॉस्पिटल ने लोगों को किया जागरूक
ग्लूकोमा यानी काला मोतिया के प्रति लोगों को सचेत करने के उद्देश्य से दृष्टि आई हॉस्पिटल द्वारा ‘ग्लूकोमा अवेयरनेस वॉक’ का आयोजन किया गया। इस जागरूकता अभियान में शहर के गणमान्य नागरिकों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वॉक के माध्यम से संदेश दिया गया कि यदि समय रहते आंखों की जांच करा ली जाए, तो ग्लूकोमा के कारण होने वाले अंधेपन से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पीजीआई चंडीगढ़ के एडवांस आई सेंटर के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरिंदर पंडोव ने जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने ग्लूकोमा की गंभीरता को रेखांकित करते हुए इसे “साइलेंट थीफ ऑफ साइट” (दृष्टि का मौन चोर) करार दिया। डॉ. पंडोव ने कहा कि यह बीमारी बिना किसी शुरुआती लक्षण के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को छीन लेती है, इसलिए नियमित अंतराल पर आंखों की जांच करवाना अनिवार्य है।
इन लोगों को है अधिक खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्लूकोमा किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ श्रेणियों में इसका जोखिम अधिक रहता है। डॉ. पंडोव ने बताया कि:
- 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति।
- मधुमेह (डायबिटीज) या उच्च रक्तचाप (बीपी) से पीड़ित मरीज।
- जिनके परिवार में पहले से ग्लूकोमा का इतिहास रहा हो। इन लोगों को विशेष रूप से हर साल अपनी आंखों का पूर्ण परीक्षण कराना चाहिए ताकि समय रहते बीमारी की पहचान हो सके।
नियमित उपचार से रुक सकता है अंधत्व
दृष्टि आई हॉस्पिटल के चीफ मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अशोक गुप्ता ने कहा कि जागरूकता की कमी के कारण लोग अक्सर तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब रोशनी काफी कम हो चुकी होती है। उन्होंने जोर दिया कि समय पर पहचान और लगातार उपचार से अंधेपन के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
अस्पताल की ग्लूकोमा विशेषज्ञ डॉ. रेनू सोहने और सीनियर आई सर्जन डॉ. रीति सैनी ने भी बीमारी के लक्षणों और आधुनिक उपचार पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अवेयरनेस वॉक के दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर लोगों को अपनी आंखों की देखभाल के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया।

