गारबेज कलेक्शन रेट बने मुसीबत, ग्रामीणों में रोष

गारबेज कलेक्शन रेट बने मुसीबत, ग्रामीणों में रोष

चंडीगढ़/पंचकूला, 13 अक्तूबर (नस)

चंडीगढ़ में गारबेज कलेक्शन रेट अब लोगों की मुसीबत बन गए हैं और रोजाना नगर निगम के पास इस संबंध में शिकायतें पहुंच रही हैं। लोगों में इस बात को लेकर खासा रोष देखने को मिल रहा है कि नगर निगम बिना विचार किए गारबेज के भारी-भरकम बिल लोगों को भेज रहा है जबकि लोग पहले से ही कई करों के बोझ के नीचे दबे हुए हैं।

नगर निगम में शामिल हुए ग्रामीणों को भी गारबेज कलेक्शन रेट से खतरा महसूस हो रहा है। इस संबंध में अकाली दल के पार्षद हरदीप सिंह बुटेरला कुछ गांवों के लोगों के साथ हाल ही में निगम में धरने पर बैठ गए थे। उनकी निगम कमिश्नर के साथ भी मुलाकात हुई। पार्षद हरदीप का कहना था कि ये बिल तो पानी के रेट से भी कहीं अधिक हैं। हालांकि, निगम को गारबेज कलेक्शन रेट को लेकर जागरूकता अभियान चलाना शुरू करना चाहिए, जिस पर कमिश्नर का कहना है कि निगम की सदन की बैठक में ये रेट तय होते हैं।

सदन की बैठक में विपक्ष जतायेगा रोष

इस बार महीने के आखरी सप्ताह में होने वाली नगर निगम के सदन की बैठक में गारबेज कलेक्शन रेट को लेकर विपक्ष सदन में हल्ला बोल सकता है। गौरतलब है कि कई तरह के करों की मार झेल रहे शहरवासियों के लिए कचरा उठाए जाने का शुल्क जेब पर भारी पड़ रहा है। कभी कचरा उठाए जाने का रेट 50 से 150 के आसपास हुआ करता था, अब वहीं रेट 12-14 हजार से लेकर 24 हजार तक पहुंच चुके हैं। पिछले दिनों एक व्यक्ति को 12,400 तक का बिल आया था।

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें

ज़रूर पढ़ें

‘राइट टू रिकॉल’ की प्रासंगिकता का प्रश्न

‘राइट टू रिकॉल’ की प्रासंगिकता का प्रश्न

शाश्वत जीवन मूल्य हों शिक्षा के मूलाधार

शाश्वत जीवन मूल्य हों शिक्षा के मूलाधार

कानूनी चुनौती के साथ सामाजिक समस्या भी

कानूनी चुनौती के साथ सामाजिक समस्या भी

देने की कला में निहित है सुख-सुकून

देने की कला में निहित है सुख-सुकून

मुख्य समाचार

उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश, 23 की मौत

उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश, 23 की मौत

मौसम की मार नैनीताल का संपर्क कटा। यूपी में 4 की गयी जान

अपनी सियासी पार्टी बनाएंगे कैप्टन

अपनी सियासी पार्टी बनाएंगे कैप्टन

भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे के लिए बातचीत को तैयार

दुर्भाग्य से यह देश का  यथार्थ : ऑक्सफैम

दुर्भाग्य से यह देश का  यथार्थ : ऑक्सफैम

भुखमरी सूचकांक  पाक, नेपाल से पीछे भारत