Judicial Custody Ordered: रिश्वत के पांच लाख नहीं हुए बरामद, राजजीत हुंदल न्यायिक हिरासत में
Judicial Custody Ordered: पुलिस-नशा तस्कर गठजोड़ से जुड़े मामले में बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह हुंदल का तीन दिन का पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद शुक्रवार को उन्हें मोहाली की विशेष अदालत में पेश किया गया। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स...
Judicial Custody Ordered: पुलिस-नशा तस्कर गठजोड़ से जुड़े मामले में बर्खास्त एआईजी राजजीत सिंह हुंदल का तीन दिन का पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद शुक्रवार को उन्हें मोहाली की विशेष अदालत में पेश किया गया। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) रिश्वत के पांच लाख रुपये बरामद नहीं कर सकी। इसके बाद अदालत ने हुंदल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इसी दौरान एएनटीएफ ने कोर्ट परिसर में ही उन्हें एनडीपीएस के एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया।
नए मामले में एएनटीएफ ने अदालत से राजजीत हुंदल का सात दिन का पुलिस रिमांड मांगा था। जांच एजेंसी ने अदालत में दलील दी कि हुंदल जब एसएसपी पद पर तैनात थे, उस दौरान तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को कथित तौर पर शह मिली थी। इस मामले में हुंदल से पूछताछ की जानी है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राजजीत हुंदल का चार दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया।
2017 की एफ आईआर से जुड़ा है मामला
राजजीत हुंदल के खिलाफ कार्रवाई का संबंध वर्ष 2017 में दर्ज एसटीएफ की एफआईआर नंबर 1 से है। यह एफआईआर 12 जून 2017 को थाना स्पेशल टास्क फोर्स मोहाली में तत्कालीन इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह के खिलाफ दर्ज की गई थी। इसमें एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 21, 22, 59(2)(बी) और आईपीसी की धाराओं 218, 466, 471 व 120-बी समेत अन्य धाराएं लगाई गई थीं। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार जांच के दौरान इंदरजीत सिंह पर नशा तस्करों के साथ कथित मिलीभगत, नशीले पदार्थों की तस्करी में मदद, लोगों को झूठे ड्रग मामलों में फंसाने और वसूली जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की बरामदगी वाले कुछ मामलों में जांच प्रक्रिया का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया।
हुंदल की भूमिका की जांच के लिए बनी थी एसआईटी
इंदरजीत सिंह के साथ राजजीत हुंदल के कथित संबंधों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दिसंबर 2017 में अलग से जांच के आदेश दिए थे। अदालत ने राजजीत हुंदल और इंदरजीत सिंह के बीच संबंधों की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की थी। इसमें सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, प्रबोध कुमार और कुंवर विजय प्रताप सिंह शामिल थे। वर्ष 2023 में एसआईटी की रिपोर्टों के आधार पर पंजाब सरकार ने बाद में राजजीत हुंदल को सेवा से बर्खास्त किया। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज सरकारी कार्रवाई के अनुसार सरकार ने डीजीपी को निर्देश दिए कि राजजीत हुंदल को एफआईआर नंबर 1 में आईपीसी की धारा 120-बी के तहत आरोपी के तौर पर नामजद किया जाए।

