पंजाब में अलग पार्टी बना सकते हैं किसान

गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पंजाब मिशन-2022 की तरफ किया इशारा

पंजाब में अलग पार्टी बना सकते हैं किसान

चंडीगढ़ में बुधवार को किसानों के समारोह में पहंुचे भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी व अन्य वक्ता। -मनोज महाजन

आदित्य शर्मा/नगर संवाददाता

चंडीगढ़/पंचकूला, 21 जुलाई

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में किसान अपनी अलग पार्टी बना सकते हैं। बुधवार को गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने चंडीगढ़ में पंजाब मिशन-2022 की घोषणा करते हुए इन बातों का खुलासा मजदूर-किसान दलित फ्रंट और नरेगा वर्कर  फ्रंट की तरफ से चंडीगढ़ के सेक्टर 29 में करवाये गये सेमीनार के दौरान व्यक्त किये। चढ़ूनी ने कहा कि यदि पंजाब की जनता ने किसानों का समर्थन दिया और उन्हें चुनाव लड़ने को कहा गया तो वह चुनाव लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।  वैसे बुधवार को उनका सात दिन का निलंबन खत्म हो चुका है और मोर्चे ने उनको शाम को बुलाया है। फिर मोर्चा जो भी फैसला ले, वह स्वतंत्र है।

संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से एक हफ्ते के लिए निलंबित किये गये गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि चाहे संयुक्त किसान मोर्चा उनको बर्खास्त भी कर देता है तो वह पंजाब के लोगों और किसानी के लिए लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब के कायाकल्प के लिए राजनीतिक पार्टियों से पीछा छुड़वाना बहुत जरूरी है। पंजाबियों ने केंद्र सरकार के विरुद्ध अपने हकों के लिए आवाज बुलंद करके साबित कर दिया है कि वह अपने फैसले आप ले सकते हैं। 

श्री चढ़ूनी ने कहा कि केंद्र और राज्यों में काबिज़ सरकार लोगों के उलट और कॉर्पोरेट घरानों के हक में फैसले लेने में लगी हुई है। इसी कारण देश में 97 फीसदी लोगों की आमदन घटती जा रही है और सिर्फ 3 फीसदी लोगों की आमदन बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की मांगों को मानकर तीनों कानून रद्द भी कर देती है तो भी लोग जीत भले ही जायें परंतू लोगों के जीवन में कोई सुधार नहीं हो सकेगा। मोदी सरकार द्वारा 7 सालों में किये सैकड़ों ऐसे काम हैं, जिन्हें सत्ता में काबिज़ होने के बाद भी ठीक नहीं किया जा सकता।

आंदोलन चलाकर किसानों ने बदली हैं सरकारें

भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने स्पष्ट किया कि आंदोलन इसी तरह चलता रहेगा। संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से बर्ख़ास्त किये जाने के बावजूद वह किसानी और पंजाब की लड़ाई लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी हरियाणा में तीन बड़े आंदोलन चलाकर किसान सरकारें बदलते आ रहे हैं। आज भी वह किसान अपने हकों के लिए साढ़े सात महीने से लड़ रहा है। मतदान में भी रवायती पार्टियों का डटकर सामना कर सकता है।

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