Explainer: ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर पर रोक क्यों लगी और सुप्रीम कोर्ट में क्या हैं प्रशासन के विकल्प?
Tribune Chowk Flyover: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले के बाद यूटी प्रशासन ने कानूनी राय और केंद्र सरकार से मांगा मार्गदर्शन; मास्टर प्लान-2031 के उल्लंघन का हवाला देकर कोर्ट ने फ्लाईओवर परियोजना पर लगाई थी रोक
चंडीगढ़ के ट्रिब्यून चौक फ्लाईओवर प्रोजेक्ट पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के कुछ दिनों बाद यूटी प्रशासन ने इस फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों की राय लेने के साथ-साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से भी सलाह मांगी है। यदि कानूनी विशेषज्ञ और केंद्र सरकार उचित समझते हैं, तो प्रशासन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन 29 मई को मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ द्वारा सुनाए गए 21 पन्नों के फैसले का गहन अध्ययन कर रहा है। यह परियोजना पूरी तरह से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित थी और मंत्रालय ने ही इसके कार्य आवंटन को मंजूरी दी थी।
गौरतलब है कि यूटी प्रशासन ने 12 मई को करीब 147.98 करोड़ रुपये की इस परियोजना का ठेका चंडीगढ़ की सिंगला कंस्ट्रक्शंस लिमिटेड को दिया था, जबकि अगले ही दिन हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 (CMP-2031) के अनुसार शहर में कहीं भी फ्लाईओवर या ओवरब्रिज बनाने की अनुमति नहीं है, क्योंकि इससे शहर की विरासत, दृश्य सौंदर्य और पैदल यात्रियों की सुविधा प्रभावित होती है।
अदालत ने प्रशासन को ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर निर्माण से रोकते हुए कहा कि यह मास्टर प्लान का सीधा उल्लंघन है। हालांकि, ट्रैफिक जाम कम करने के लिए अंडरपास निर्माण की अनुमति दी गई है, क्योंकि मास्टर प्लान में इसका प्रावधान है।
पेड़ों की कटाई पर भी रोक
अदालत ने ट्रिब्यून चौक और आसपास के क्षेत्र में आम के पेड़ों सहित किसी भी पेड़ की कटाई पर रोक लगा दी है। साथ ही चंडीगढ़ की हरित, विरासत और नियोजित शहर की पहचान को बनाए रखने के निर्देश भी दिए हैं।
मास्टर प्लान को बताया बाध्यकारी
फैसले में कहा गया कि CMP-2031 एक वैधानिक दस्तावेज है, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के बिना बदला नहीं जा सकता। प्रशासन यह साबित नहीं कर पाया कि फ्लाईओवर पर लगी रोक संबंधी प्रावधान में कभी संशोधन किया गया हो।
अदालत ने प्रशासन के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि दक्षिण मार्ग (दक्षिण मार्ग) विरासत क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। अदालत ने मास्टर प्लान के नक्शों का हवाला देते हुए कहा कि यह क्षेत्र चंडीगढ़ के फेज-1 हेरिटेज जोन का अभिन्न हिस्सा है।
शहरी नियोजन विभाग से नहीं ली गई थी मंजूरी
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि फ्लाईओवर बनाने का फैसला लेते समय इंजीनियरिंग विभाग ने शहरी नियोजन विभाग से कोई औपचारिक सलाह नहीं ली थी। वर्ष 2020 में तत्कालीन मुख्य वास्तुकार ने भी लिखित रूप से कहा था कि CMP-2031 पूरे चंडीगढ़ में फ्लाईओवर निर्माण की अनुमति नहीं देता।
अदालत ने चंडीगढ़ को "देश का अंतिम सुव्यवस्थित शहर" बताते हुए प्रसिद्ध वास्तुकार ले कॉर्बुज़िए के सिद्धांतों—सूर्य, स्थान और हरियाली—का उल्लेख किया और कहा कि इन मूल्यों की रक्षा की जानी चाहिए।
प्रमुख घटनाक्रम
- 20 नवंबर 2019: फ्लाईओवर के लिए पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट की रोक।
- 28 नवंबर 2019: टेंडर प्रक्रिया को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर।
- 28 दिसंबर 2020: मुख्य वास्तुकार ने फ्लाईओवर पर आपत्ति जताई।
- 30 अप्रैल 2024: पेड़ों की कटाई पर लगी अंतरिम रोक हटाई गई।
- 12 अगस्त 2024: नई जनहित याचिका दाखिल।
- 14 अक्टूबर 2024: प्रशासन को परियोजना आगे बढ़ाने के निर्देश।
- 12 मई 2026: 147.98 करोड़ रुपये का ठेका जारी।
- 15 मई 2026: पेड़ों की कटाई पर फिर रोक।
- 29 मई 2026: अंतिम फैसला, फ्लाईओवर पर रोक और अंडरपास को मंजूरी।
