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Longewala Border : शिक्षा के उजाले से रोशन होगा लोंगेवाला बॉर्डर : डोगरा रेजिमेंट और सामाजिक संस्थाओं का साझा प्रयास, वीरभूमि के स्कूली बच्चों के हाथों में सौंपी किताबें

कॉम्पिटेंट फाउंडेशन, सीमा जन कल्याण समिति और अभ्युदय ने जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के साथ मिलकर चलाया अभियान; संजय टंडन ने छात्रों को बताया 'फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस'

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Longewala Border : 1971 के ऐतिहासिक युद्ध की गवाह रही लोंगेवाला बॉर्डर की वीरभूमि पर अब शिक्षा का नया उजाला फैल रहा है। ट्राइसिटी की कॉम्पिटेंट फाउंडेशन ने कई अन्य सामाजिक संगठनों और भारतीय सेना के सहयोग से लोंगेवाला सेक्टर के अग्रिम (फॉरवर्ड) क्षेत्रों में स्कूली छात्रों को बड़े पैमाने पर अध्ययन सामग्री वितरित की है। इस साझा प्रयास का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के सीमावर्ती स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई के समान अवसर और बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराना है।

फाउंडेशन के संजय टंडन ने इस मौके पर कहा कि सीमा पर रहने वाले छात्र और नागरिक देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। वे देश की 'पहली रक्षा पंक्ति' (फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस) का हिस्सा होते हैं। उन्होंने बताया कि इन बच्चों को पढ़ाई का सामान इसलिए दिया गया है ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपनी शिक्षा जारी रख सकें। पढ़ाई के जरिए वे आत्मविश्वास के साथ अपने सपने पूरे कर सकेंगे। बुनियादी शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच मिलने से ये छात्र भविष्य में जागरूक और सक्षम नागरिक बनेंगे, जो देश की रक्षा और सेवा में अपना अहम योगदान देंगे।

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16 डोगरा रेजिमेंट और संस्थाओं का मिला साथ

इस सामाजिक अभियान को सफल बनाने में भारतीय सेना की 16 डोगरा रेजिमेंट के जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी संजय टंडन ने विशेष रूप से सराहना की। अभियान में जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र, सीमा जन कल्याण समिति और अभ्युदय संस्था ने भी कॉम्पिटेंट फाउंडेशन का सक्रिय साथ दिया। इस अवसर पर अभ्युदय से पनींद्र वेलुर, सीमा जन कल्याण समिति के संगठन सचिव वासुदेव और जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र के राम कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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महावीर चक्र विजेता मेजर चांदपुरी से जुड़ा है इतिहास

गौरतलब है कि लोंगेवाला क्षेत्र का अत्यंत ऐतिहासिक महत्व है। यह वही रणक्षेत्र है जहां 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी गई थी। यह स्थान महावीर चक्र से सम्मानित युद्ध नायक मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी की वीरता से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ‘हेल्प एवर, हर्ट नेवर’ (हमेशा मदद करो, कभी दुख मत दो) के आदर्श वाक्य से प्रेरित होकर जब यह दल इस ऐतिहासिक गांव में पहुंचा, तो छात्रों और ग्रामीणों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। समुदाय के नेताओं की उपस्थिति ने इस अभियान के प्रभाव को और बढ़ा दिया, जिससे सामाजिक विकास के लिए निरंतर सहयोग की प्रतिबद्धता और मजबूत हुई है।

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