Derabassi Poppy Husk Case : तलाशी में खामी और स्वतंत्र गवाह नहीं होने पर 22 किलो भुक्की का आरोपी बरी
कोर्ट ने कहा, बरामदगी की प्रक्रिया में गंभीर खामियां मिलीं
Derabassi Poppy Husk Case : डेराबस्सी पुलिस की ओर से 22 किलो भुक्की (चूरा-पोस्त) बरामद करने के दावे से जुड़े मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने डेराबस्सी निवासी करनैल सिंह को बरी कर दिया। अदालत ने तलाशी और बरामदगी की प्रक्रिया में खामियों तथा स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं किए जाने को अहम माना। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
मामले के अनुसार, 27 अगस्त 2019 को एएसआई बलबीर सिंह पुलिस पार्टी के साथ गश्त पर थे। पुलिस के मुताबिक, संदेह के आधार पर करनैल सिंह को रोककर उसकी और कार की तलाशी ली गई। इस दौरान 22 किलो भुक्की बरामद होने का दावा किया गया। बरामद पदार्थ के नमूने फोरेंसिक लैब भेजे गए, जहां रिपोर्ट में पदार्थ के भुक्की होने की पुष्टि हुई।
धारा 50 की प्रक्रिया पर भी सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि तलाशी के दौरान एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। अदालत ने भी तलाशी की पेशकश से संबंधित कार्रवाई को अधूरा माना। कोर्ट के अनुसार, जांच अधिकारी ने कानूनी प्रक्रिया के तहत जरूरी कदम नहीं उठाए। इससे तलाशी और बरामदगी की कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
आम रास्ते पर बरामदगी, फिर भी गवाह नहीं
अदालत ने कहा कि कथित बरामदगी ऐसी जगह से बताई गई, जहां आम लोगों की आवाजाही रहती थी। इसके बावजूद जांच के दौरान किसी स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया गया। स्वतंत्र गवाह को शामिल नहीं करने का कोई संतोषजनक कारण भी रिकॉर्ड पर नहीं आया।
अदालत के अनुसार, इन परिस्थितियों में कथित बरामदगी की प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा होता है। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्य आरोपी के कब्जे और कथित बरामदगी को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए करनैल सिंह को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया।

