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CLF Literati Spring Fest 2026 : मशीनी युग में भी धड़कता रहेगा साहित्य का दिल, एआई नहीं ले सकता मानवीय भावनाओं की जगह

चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी का 'सीएलएफ लिटराटी स्प्रिंग फेस्ट 2026' : पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सुनाए कोरोना काल के किस्से, तो मनीष तिवारी ने वैश्विक चुनौतियों पर रखी बेबाक राय

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CLF Literati Spring Fest 2026 :  तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस तेजी से बदलते दौर में भी इंसान की भावनाओं और साहित्य की अहमियत कम नहीं हुई है। मशीनें कभी भी मानवीय संवेदनाओं की असली नकल नहीं कर सकतीं। इसी शाश्वत संदेश के साथ रविवार को सेक्टर-17 स्थित हयात सेंट्रिक में चंडीगढ़ लिटरेरी सोसाइटी (सीएलएस) के प्रतिष्ठित 'सीएलएफ लिटराटी स्प्रिंग फेस्ट 2026' का शानदार आयोजन हुआ। दिनभर चले इस साहित्यिक कुंभ में साहित्य, राजनीति और कला जगत की जानी-मानी हस्तियों ने शब्दों, विचारों और सांस्कृतिक संवाद की त्रिवेणी बहाई।

डेटा नहीं, दिल की भाषा है साहित्य

महोत्सव का आगाज सीएलएस की संस्थापक चेयरपर्सन और फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. सुमिता मिश्रा (आईएएस) के विचारोत्तेजक संबोधन से हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानवीय हृदय को महज डेटा तक सीमित नहीं किया जा सकता। रचनाकार जिन गहराइयों को शब्दों में पिरोते हैं, वह किसी भी एल्गोरिदम की पहुंच से बाहर है। तकनीक हमारी दुनिया बदल सकती है, लेकिन कहानी कहने की कला हमेशा इसके पार रहेगी। 'क्राफ्ट एंड क्रिएटिविटी इन द एज ऑफ एआई' सत्र में विक्टर घोष और अफ़्फ़ान यस्वी ने भी इसी विषय पर इवनीत कौर वालिया के साथ मंथन किया।

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स्मृति ने साझा की 'आउट-ऑफ-द-बॉक्स' सोच

 साहित्य के इस मंच पर राजनीति और नेतृत्व के बदलते स्वरूप पर भी गहरी चर्चा हुई। ‘द चेंजिंग फेस ऑफ लीडरशिप’ सत्र में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम करने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे कोरोना महामारी के दौरान स्वदेशी पीपीई किट तैयार करने की उनकी 'आउट-ऑफ-द-बॉक्स' सोच को पीएम का पूरा समर्थन मिला, जिससे सरकारी खजाने पर बिना अतिरिक्त बोझ डाले बड़ा काम हुआ। वहीं, ‘ए वर्ल्ड एड्रिफ्ट’ सत्र में स्थानीय सांसद मनीष तिवारी ने वरिष्ठ पत्रकार मनराज ग्रेवाल शर्मा के साथ अपनी किताब पर चर्चा करते हुए वर्तमान वैश्विक और राजनीतिक चुनौतियों का बेबाकी से विश्लेषण किया।

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दूरदर्शन की यादें, किताबों की खुशबू और मुशायरे का रंग

यह फेस्ट केवल गंभीर चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा। ‘दूरदर्शन डायरीज’ में दिग्गज टीवी एंकर शीला चमन ने पुराने दिनों की यादें ताजा कीं। इस दौरान मुकुल कुमार की किताब ‘कथारसिस: ए सिम्फनी ऑफ सिग्स’ का विमोचन भी हुआ। रंजीत पवार, मिलन वोहरा, जोनाथन गिल हैरिस और अर्श वर्मा जैसे लेखकों ने अपने-अपने सत्रों में युवाओं, रिश्तों और इतिहास के पन्नों को पलटा। कार्यक्रम का शानदार समापन ‘महफ़िल-ए-सुखन’ से हुआ, जहां डॉ. माधव कौशिक, कस्तूरिका मिश्रा, सविता सिंह, मुकुल कुमार और बुब्बू तीर ने हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी में अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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