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चंडीगढ़ में दूषित पानी पर सियासी घमासान: MP तिवारी ने लोकसभा में उठाया मुद्दा तो मेयर जोशी ने किया पलटवार

मौली जागरा में दूषित पानी पीने से एक बच्चे की मौत का मामला सामने आया है : मनीष तिवारी

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Chandigarh News : चंडीगढ़ में दूषित पेयजल आपूर्ति के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। एक ओर चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में इसे ‘अत्यावश्यक जनहित’ का मामला बताते हुए उठाने की अनुमति मांगी, वहीं दूसरी ओर मेयर सौरभ जोशी ने पलटवार करते हुए कहा कि नगर निगम से जुड़े मुद्दे कॉरपोरेशन में ही उठाए जाने चाहिए, न कि “480 किलोमीटर दूर लोकसभा में।”

सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में नोटिस देकर कहा कि शहर के कई इलाकों, विशेषकर मौली जागरा और आसपास के क्षेत्रों में दूषित व असुरक्षित पानी की आपूर्ति हो रही है। उन्होंने बताया कि गंदे पानी के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं, जिससे नागरिकों में भय और आक्रोश का माहौल है।

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तिवारी ने अपने नोटिस में उल्लेख किया कि मौली जागरा में दूषित पानी पीने से एक बच्चे की मौत का मामला सामने आया है, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने जल गुणवत्ता की निगरानी, पाइपलाइन रखरखाव और स्वच्छता प्रबंधन में खामियों की ओर इशारा करते हुए केंद्र सरकार व संबंधित अधिकारियों से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने, स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

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मेयर का पलटवार

मेयर सौरभ जोशी ने सांसद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह मिलकर काम करना चाहते हैं, लेकिन नगर निगम के मामलों को पहले कॉरपोरेशन में उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मौली जागरा में गंदे पानी की समस्या सामने आई, तब सांसद को इसकी जानकारी भी नहीं थी और उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट मांग ली थी।

जोशी ने चुटकी लेते हुए कहा, “वह बुद्धिजीवी वर्ग से आते हैं, हम उनसे लड़ाई नहीं लड़ सकते। हमें तो जमीन पर लड़ाई लड़नी है।” मेयर ने स्पष्ट किया कि जहां-जहां गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायत मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने पानी की लाइन को जानबूझकर पंचर किया है या छेड़छाड़ की है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

नागरिकों का कहना है कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

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