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चंडीगढ़ में नंबरों की दीवानगी: '0001' के लिए लगी 53.88 लाख की बोली, RLA को 4.48 करोड़ की बंपर कमाई

CH01-DD सीरीज के लिए तीन दिन चली होड़, लग्जरी कार की कीमत में बिका महज एक नंबर; शौकीनों ने दिल खोलकर खर्च किए पैसे

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Chandigarh News : 'सिटी ब्यूटीफुल' में वीआईपी नंबरों का क्रेज एक बार फिर सिर चढ़कर बोला है। चंडीगढ़ के रईसों ने अपनी पसंदीदा गाड़ियों के लिए खास पहचान पाने की खातिर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (RLA) द्वारा नई सीरीज 'CH01-DD' के लिए आयोजित तीन दिवसीय ई-नीलामी में '0001' नंबर ने इस बार सबको हैरान कर दिया। इस खास नंबर को हासिल करने के लिए सबसे ऊंची बोली ₹53,88,000 की लगी। 4 मार्च से शुरू हुई यह नीलामी 6 मार्च 2026 को समाप्त हुई, जिससे प्रशासन के खजाने में कुल ₹4,48,87,000 का भारी-भरकम राजस्व जमा हुआ।

नीलामी प्रक्रिया के दौरान शहर के शौकीनों के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिली। आरएलए कार्यालय के अनुसार, इस प्रक्रिया में कुल 591 पंजीकरण नंबरों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई है। इसमें नई सीरीज़ के साथ-साथ पुरानी सीरीज के बचे हुए फैंसी और विशेष नंबरों को भी शामिल किया गया था।

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सिर्फ 0001 ही नहीं, इन नंबरों के लिए भी चली 'नंबरों की जंग'

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नीलामी के आंकड़ों पर नजर डालें तो '0001' के बाद सबसे ज्यादा होड़ '0003' नंबर के लिए देखने को मिली। CH01-DD-0003 नंबर के लिए ₹32,32,000 की दूसरी सबसे बड़ी बोली लगाई गई। यह राशि शहर में बिकने वाली कई प्रीमियम एसयूवी (SUV) की कीमत से भी अधिक है। इसके अलावा अन्य नंबरों के लिए भी लोगों ने लाखों रुपये खर्च किए:

0005 नंबर: यह नंबर 17,50,000 रुपये में नीलाम हुआ।

0009 नंबर: इसके लिए शौकीनों ने 14,40,000 रुपये की बोली लगाई।

0007 नंबर: इस नंबर को हासिल करने के लिए 14,22,000 रुपये खर्च किए गए।

1000 नंबर: दिलचस्प बात यह है कि इस राउंड नंबर के लिए भी 9,19,000 रुपये की ऊंची बोली लगी।

0006 और 0008: इन नंबरों के लिए क्रमशः 8,50,000 रुपये और 8,24,000 रुपये की अंतिम बोली प्राप्त हुई।

0002 और 0100: सूची के अंत में 0002 नंबर 7,25,000 रुपये में और 0100 नंबर 6,23,000 रुपये में बिका।

डिजिटल नीलामी से रिकॉर्ड तोड़ राजस्व

आरएलए के अधिकारियों का मानना है कि पारदर्शी ई-नीलामी प्रणाली के कारण लोग बिना किसी संकोच के अपनी पसंद के नंबरों पर ऊंची बोलियां लगा रहे हैं। चंडीगढ़ में गाड़ी का नंबर अब सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि एक बड़ा 'स्टेटस सिंबल' बन चुका है। नीलामी के इन नतीजों ने यह साफ़ कर दिया है कि चंडीगढ़ के लोगों के शौक में कोई कमी नहीं आई है। केवल टॉप-10 नंबरों से ही करोड़ों का राजस्व जुटा लिया गया है। प्रशासन के लिए यह अब तक की सबसे सफल नीलामियों में से एक रही है।

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