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Chandigarh: सिटी ब्यूटीफुल की सड़कों से गायब हो रहे तंदूर, तीसरी-चौथी पीढ़ी के संचालकों पर रोजी-रोटी का संकट

लाइसेंस और नियमित फीस के बावजूद काम करने की अनुमति न मिलने का आरोप; तंदूर संचालकों की तीसरी-चौथी पीढ़ी ने मेयर सौरभ जोशी से लगाई गुहार

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मेयर से मिलने पहुंचे तंदूर संचालक। ट्रिब्यून फोटो
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कभी चंडीगढ़ की सड़कों और बाजारों में तंदूर पर रोटियां सेंकते नजर आने वाले तंदूर वाले अब धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं। तंदूर चलाने वाले परिवारों का कहना है कि पीढ़ियों से चले आ रहे इस पारंपरिक रोजगार पर अब संकट खड़ा हो गया है। तीसरी और चौथी पीढ़ी तक तंदूर का काम करने वाले परिवारों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

इसी समस्या को लेकर तंदूर संचालकों की तीसरी और चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधियों ने चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी से मुलाकात की और अपनी परेशानी उनके सामने रखी। तंदूर संचालकों ने मांग की कि जिन लोगों के लाइसेंस वैध हैं और जो नियमित रूप से फीस जमा कर रहे हैं, उन्हें तंदूर चलाने की अनुमति दी जाए।

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लाइसेंस होने के बावजूद काम नहीं मिलने की शिकायत

तंदूर संचालकों का कहना है कि उनके लाइसेंस बने हुए हैं और वे निर्धारित फीस भी नियमित रूप से जमा करते हैं। इसके बावजूद उन्हें पहले की तरह काम करने का अवसर नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर उनके परिवारों की आय पर पड़ रहा है।

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संचालकों के मुताबिक, तंदूर का काम उनके लिए महज रोजगार नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक आजीविका है। कई परिवारों में दादा और पिता के बाद बेटों ने भी इसी काम को अपनाया। अब काम सीमित होने के कारण इस परंपरागत रोजगार को आगे बढ़ाने वाली नई पीढ़ी के सामने भी भविष्य का सवाल खड़ा हो गया है।

परिवारों की रोजी-रोटी बचाने की मांग

तंदूर संचालकों ने मेयर के सामने अपनी मांग रखते हुए कहा कि वैध लाइसेंस वाले संचालकों को काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि उन्हें नियमित रूप से काम करने का अवसर मिलता है तो वे अपने परिवारों का पालन-पोषण कर सकेंगे।

उन्होंने प्रशासन से अपील की कि तंदूर संचालन से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए वैध लाइसेंसधारकों के लिए काम का रास्ता साफ किया जाए, ताकि पीढ़ियों से चली आ रही आजीविका अचानक खत्म न हो।

तंदूर संचालकों का कहना है कि उनका उद्देश्य नियमों की अनदेखी करना नहीं, बल्कि नियमों के दायरे में रहकर अपना पारंपरिक रोजगार जारी रखना है। अब उनकी नजर प्रशासन की ओर से इस मामले में होने वाली कार्रवाई पर है।

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