चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी फंड घोटाला: सीबीआई ने फिर कसा शिकंजा, चंडीगढ़-लुधियाना में पांच ठिकानों पर छापेमारी
स्मार्ट सिटी और नगर निगम फंड के दुरुपयोग मामले में सीबीआई की नई कार्रवाई
Chandigarh-Punjab CBI Raid : चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) और चंडीगढ़ नगर निगम के बैंक खातों से सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की जांच अब और गहराती जा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में पांच स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाकर मामले से जुड़े अहम डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य जुटाए। एजेंसी का फोकस उन लोगों पर रहा, जिन पर सरकारी फंड के कथित गबन से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ लेने का संदेह है। जांच के दौरान जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वित्तीय दस्तावेज और संपत्ति संबंधी कागजात की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है, जिससे धन के प्रवाह और लाभार्थियों की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके।
संदिग्ध लाभार्थियों और निजी कंपनियों पर फोकस
सीबीआई के अनुसार तलाशी अभियान उन परिसरों पर केंद्रित रहा, जहां से जांच में महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना थी। इनमें चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के एक सरकारी कर्मचारी अनुभव मिश्रा के ठिकाने, मामले से जुड़ी निजी कंपनियों के कार्यालय और उन लोगों के आवास एवं कारोबारी प्रतिष्ठान शामिल हैं, जिन पर सरकारी धन के गलत इस्तेमाल से लाभ उठाने का संदेह है। तलाशी के दौरान हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डिजिटल सिग्नेचर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े कागजात तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब इनकी तकनीकी और वित्तीय जांच कर रही है।
657 करोड़ रुपये के कथित फंड डायवर्जन की जांच
यह मामला उस बड़े कथित वित्तीय घोटाले से जुड़ा है, जिसमें हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के लगभग 657 करोड़ रुपये सरकारी खातों से फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और कथित धोखाधड़ी वाले डेबिट ट्रांजेक्शन के माध्यम से निकाले जाने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार बाद में इस राशि को विभिन्न शेल कंपनियों के जरिए अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर धन के स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने यह जांच राज्य के विजिलेंस एवं एंटी करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी।
हरियाणा केस में 17 आरोपी पहले ही चार्जशीटेड
सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की कई स्तरों पर जांच कर रही है। हरियाणा से जुड़े मुख्य मामले में एजेंसी अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारी, दो कंपनियां और छह निजी व्यक्ति शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि बैंकिंग प्रणाली और फर्जी वित्तीय लेन-देन का इस्तेमाल कर सरकारी धन को अवैध तरीके से बाहर निकाला गया।
चंडीगढ़ के दो मामलों में भी चार्जशीट दाखिल
सीबीआई ने चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की जांच भी अपने हाथ में ली है। पहला मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम से संबंधित है, जबकि दूसरा चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) से जुड़ा है। स्मार्ट सिटी मामले में एजेंसी पहले ही पांच बैंक अधिकारियों, एक आईएफएस अधिकारी और एक निजी व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वहीं, क्रेस्ट मामले में पांच बैंक अधिकारियों, दो क्रेस्ट अधिकारियों, चार निजी व्यक्तियों और दो कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।
डिजिटल ट्रेल से खुल सकते हैं नए राज
जांच एजेंसियों का मानना है कि ताजा तलाशी में जब्त डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डेटा से फंड के वास्तविक प्रवाह, लाभार्थियों की भूमिका और कथित साजिश की परतें खुल सकती हैं। इसी आधार पर आने वाले दिनों में पूछताछ का दायरा बढ़ने और जांच में नए नाम सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। फिलहाल सीबीआई जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

