ईज आफ लिविंग इंडेक्स

पांचवें से 29वें स्थान पर खिसका चंडीगढ़

स्वास्थ्य, शिक्षा, ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा हैं रैंकिंग के मानदंड

पांचवें से 29वें स्थान पर खिसका चंडीगढ़

ट्रिब्यून न्यूज़ सर्विस

चंडीगढ़, 4 मार्च

रहने के लिए सबसे बेहतर शहर (ईज आफ लिविंग-इंडेक्स रैंकिंग-2020) में चंडीगढ़ इस बार 54.40 अंकों के साथ 29वें स्थान पर है। देश के 111 शहरों में किए गए सर्वे के नतीजे आज केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री हरदीप पुरी ने दिल्ली में घोषित किए। ज्ञात रहे कि वर्ष 2018 के सर्वे में चंडीगढ़ पांचवें स्थान पर आया था।

उल्लेखनीय है कि यह सर्वे जनवरी 2020 में शुरू हुआ था व गत वर्ष मार्च माह तक चला। लोगों के फीडबैक के सर्वे में 30 प्रतिशत अंक मिलने थे व उन्हें शहर में दी जा रही सुविधाओं के संबंध में 24 सवालों पर फीडबैक देनी थी।

ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स रैंकिंग-2020 के अनुसार देश में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में रहने के लिए बेंगलुरू 66.70 अंकों के साथ सबसे बेहतर शहर बना व 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों में शिमला 60.90 अंकों के साथ पहले नम्बर पर है। चंडीगढ़ में रहने की गुणवत्ता, सुरक्षा, विकास, चिकित्सा और शिक्षा जैसी सारी सुविधाएं बेहतरीन हैं लेकिन फिर भी 29वां रैंक मिलना आश्चर्यजनक है।

इस सर्वे के लिए बनाई गई 14 श्रेणियों में शहर की शिक्षा का स्तर, स्वास्थ्य, आवास और आश्रय, साफ सफाई, ट्रांसपोर्ट सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था, आर्थिक विकास का स्तर, आर्थिक अवसर, पर्यावरण, ग्रीन एरिया, बिल्डिंग, एनर्जी खपत आदि की समीक्षा की गई। इसके बाद लोगों के बीच सर्वे किया गया। उसके बाद सभी 111 शहरों की समीक्षा करने के बाद उनकी रैंकिंग दी गई।

चंडीगढ़ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि देश में चंडीगढ़ नगर निगम का 23वें रेंक व लिविंग इंडेक्स में 29वें रेंक पर आना बेहद चिंताजनक है। चंडीगढ़ की भाजपा के राज में स्थिति बदतर होती जा रही है । उनका कहना था कि भाजपा सांसद किरण खेर का गायब रहना व नगर निगम में भाजपा पार्षदों के अनुभवहीन होने का नतीजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। अगले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस नगर निगम में काबिज होते ही शहर का सम्मान वापस लायेगी। फेडरेशन ऑफ सेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़ के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि शहर ने इतना खराब प्रदर्शन किया है। इससे स्पष्ट है कि नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

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