Chandigarh Rose Festival में मानवता की महक, 3 दिन में 139 लोगों ने लिया अंगदान का संकल्प
सैकड़ों लोगों ने प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों की जानकारी हासिल की
गुलाबों की खुशबू और रंगों के उत्सव के बीच इस बार रोज फेस्टिवल ने एक गहरा सामाजिक संदेश भी दिया। जहां लोग प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने पहुंचे थे, वहीं 139 नागरिकों ने अंगदान की शपथ लेकर यह साबित किया कि असली महक संवेदनशीलता और करुणा की होती है। यह संकल्प किसी अनजान जरूरतमंद के लिए जीवन की नई शुरुआत बन सकता है।
पीजीआई के क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (रोटो) द्वारा 20 से 22 फरवरी तक लगाए गए जागरूकता एवं प्रतिज्ञा शिविर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। तीन दिनों के दौरान 139 लोगों ने औपचारिक रूप से अंगदान का संकल्प लिया, जबकि सैकड़ों लोगों ने प्रक्रिया और कानूनी प्रावधानों की जानकारी हासिल की।
परिवारों ने मिलकर लिया संकल्प
डेराबस्सी की दिया ने प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि यह “जीवन के बाद भी किसी के काम आने का निर्णय” है। हिसार से आए मंजू और संदीप कुमार ने संयुक्त रूप से संकल्प लिया और बताया कि वे अपने परिवार में भी इस विषय पर चर्चा करेंगे। बलटाना के पिंदर सिंह, मोहाली के चरणजीत सिंह, चंडीगढ़ के राजेश कुमार और पटियाला के मयंक कठैत ने इसे मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी बताया।
अंबाला के विकास मल्होत्रा ने आर्थिक पहलू पर सवाल उठाया, जबकि रोहतक की शालिनी मेहता ने अंग आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता के बारे में जानकारी ली। होशियारपुर के गुरप्रीत सिंह ने दुरुपयोग रोकने के प्रावधानों पर प्रश्न किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि अंगदान की पूरी प्रक्रिया सख्त कानूनी ढांचे और पारदर्शी प्रणाली के तहत संचालित होती है।
“हर प्रतिज्ञा उम्मीद की किरण”
रोटो (उत्तर) के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने कहा कि रोज फेस्टिवल जीवन और नवजीवन का प्रतीक है, और ऐसे अवसर पर नागरिकों का आगे आना समाज में बढ़ती संवेदनशीलता और जागरूकता का संकेत है।
प्रतिज्ञा लेने वाले नागरिकों को प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए। पीजीआईएमईआर ने सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे जन-जागरूकता अभियानों को जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

