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Chandigarh News: उर्दू विद्वान डॉ. एच.के. लाल की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि, ‘खिदमत-ए-अदब’ स्मारिका का लोकार्पण

Chandigarh News: चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजन, मुफ्त उर्दू शिक्षा के 50 वर्षों को किया गया याद

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Chandigarh News:  डॉ. एचके लाल की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर वीरवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर उनके सम्मान में तैयार स्मारिका ‘खिदमत-ए-अदब’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में उनके परिवारजन, करीबी मित्रों के साथ-साथ बड़ी संख्या में उनके विद्यार्थी मौजूद रहे, जिन्हें उन्होंने दशकों तक उर्दू की शिक्षा दी।

डॉ. लाल ने करीब 50 वर्षों तक नि:शुल्क उर्दू शिक्षा देकर समाज में भाषा के प्रति प्रेम जगाया। वे पंजाब यूनिवर्सिटी (Panjab University) के उर्दू विभाग से पीएचडी पूरी करने वाले पहले छात्र भी थे। उनका मानना था “मुद्दा यह नहीं कि लोग ज्यादा उर्दू सीखें, बल्कि यह है कि ज्यादा लोग उर्दू सीखें।” डॉ. लाल के शब्दों में “मैं उम्र भर उर्दू की खिदमत करता रहूंगा, यही मेरी इबादत है, यही मेरा ईमान है।”

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इस अवसर पर उर्दू विभाग के 2024-25 सत्र के टॉपर्स खादिम हुसैन, सिमरन करवाल, मानस्वी और सीमा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ. अली अब्बास भी उपस्थित रहे। उन्होंने डॉ. लाल के बेटे विशाल अरोड़ा का आभार जताया और डॉ. लाल को उर्दू की मशाल आगे बढ़ाने वाला महान शिक्षक बताया।

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डॉ. लल्ल को उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले, जिनमें चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा सम्मान पंजाब सरकार के भाषा विभाग द्वारा बेस्ट उर्दू टीचर, फरोग-ए-अदब (Farogh-e-Adab) का विशेष पुरस्कार अंजुमन संगठन का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, फर्स्ट फ्राइडे फोरम मिशनरी आफ उर्दू (Missionary of Urdu) पंजाब यूनिवर्सिटी  एल्युमनी एसोसिएशन का खिदमत-ए-अदब (Khidmat-e-Adab) सम्मान शामिल हैं।

80 वर्ष की उम्र में भी ऑनलाइन पढ़ाई

कोविड-19 महामारी के दौरान, जब कक्षाएं बंद हो गई थीं, तब 80 वर्ष से अधिक उम्र में भी डॉ. लाल ने ऑनलाइन उर्दू पढ़ाना शुरू किया। उनके छात्र न केवल देशभर से बल्कि विदेशों से भी जुड़ते रहे। कार्यक्रम में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के उर्दू प्रकोष्ठ के निदेशक व प्रख्यात साहित्यकार डॉ. चंद्र त्रिखा, बी.के. श्रीवास्तव, निरुपमा दत्त, प्रो. गुलशन वोहरा, राजिंदर सिंह बेवली, राजकुमार शर्मा और कुलविंदर सिंह कंग सहित कई छात्रों ने भावुक होकर अपने अनुभव साझा किए।

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