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Chandigarh News : ट्रिब्यून-चितकारा प्रिंसिपल मीट : एआई युग में शिक्षा पर डाला प्रकाश

एआई के युग में शिक्षा की दिशा और दशा क्या हो। इसी पर हुआ मंथन। मौका था ट्रिब्यून-चितकारा प्रिंसिपल मीट कार्यक्रम का। चंडीगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) स्थित 110 से अधिक विद्यालयों के प्रतिनिधियों...

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चंडीगढ़ में बुधवार को द ट्रिब्यून प्रिंसिपल्स मीट कार्यक्रम की शुरुआत में दीप जलातीं चितकारा यूनिवर्सिटी की प्रो वाइस चांसलर डॉ. संगीता पंत। साथ हैं द ट्रिब्यून स्कूल की प्रिंसिपल रानी पोद्दार, लाइफ कोच एवं लेखक डॉ. विराट चिरानिया, द ट्रिब्यून में सर्कुलेशन विभाग के प्रमुख मुकेश कल्कोटी, एवं एडवरटाइजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के एजीएम अजय ठाकुर। -विक्की
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एआई के युग में शिक्षा की दिशा और दशा क्या हो। इसी पर हुआ मंथन। मौका था ट्रिब्यून-चितकारा प्रिंसिपल मीट कार्यक्रम का। चंडीगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) स्थित 110 से अधिक विद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों के प्रारंभिक पंजीकरण से हुई, जिसके बाद ट्रिब्यून प्रकाशन के प्रतिनिधियों और चितकारा विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान एवं शिक्षा कार्यक्रम विभाग की प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संगीता पंत और सेक्टर 29 स्थित ट्रिब्यून स्कूल की प्रिंसिपल रानी पोद्दार द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया। इस मौके पर चितकारा विश्वविद्यालय की प्रो-चांसलर डॉ. मधु चितकारा विशिष्ट अतिथि थीं, जबकि लेखक और लाइफ कोच डॉ. विराट चिरानिया मुख्य अतिथि थे।

सत्र का शुभारंभ चितकारा विश्वविद्यालय के सामरिक पहल कार्यालय के निदेशक संजीव दोसाझ के प्रस्तुतीकरण से हुआ। उन्होंने कहा, 'विद्यालय और शिक्षक एआई का उपयोग विभिन्न तरीकों से कर सकते हैं। बेहतर कक्षा शिक्षण के लिए एआई आउटपुट का उपयोग करके पाठ योजना तैयार करने का कार्य एआई को सौंपा जा सकता है। छात्रों के बेहतर मूल्यांकन के लिए 10 बहुविकल्पीय प्रश्नों वाली प्रश्नोत्तरी आयोजित की जा सकती है और छात्रों के बेहतर पुनरावलोकन के लिए एआई से प्राप्त संक्षिप्त सारांश आउटपुट के साथ नोट्स विकसित किए जा सकते हैं।'

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इसके बाद, चितकारा स्कूल ऑफ एजुकेशन की डीन एकेडमिक्स डॉ. पारुल सूद ने भी एआई के उपयोग के लाभ और हानियों पर चर्चा की। इस बीच, चिरानिया ने कहा कि एआई के उपयोग से बचना संभव नहीं है। उन्होंनें कहा, 'एआई मानव मस्तिष्क से अधिक शक्तिशाली नहीं है। इसलिए, भारत के स्मार्ट भविष्य के निर्माण के लिए इसका उचित उपयोग समय की आवश्यकता है। मैं द ट्रिब्यून पब्लिकेशन और चितकारा विश्वविद्यालय को ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई देता हूं, जिसमें व्यक्तियों के चरित्र निर्माण के लिए जिम्मेदार प्रधानाचार्य शामिल हैं।'

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डॉ. मधु चितकारा ने प्रधानाचार्यों से भी बातचीत की और खुले संवाद के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन करने हेतु ट्रिब्यून प्रकाशनों को बधाई दी। उन्होंने कहा, 'यह उन अनूठे आयोजनों में से एक है, जहां उच्च और स्कूली शिक्षाविद एआई के महत्व पर खुलकर चर्चा करने के लिए एक मंच पर आ रहे हैं। युवा दिमाग नयी खोजें करने में सक्षम हैं और यहीं पर एक मार्गदर्शक के रूप में हमारी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। चितकारा में, हमारे पास एआई-आधारित कई पाठ्यक्रम हैं और हमने कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए हैं। ऐसे मंच पर, एआई के उपयोग के लाभ और हानियों पर चर्चा करना आसान है। एआई के अलावा, ध्यान के महत्व पर चर्चा करना भी एक ऐसा विषय है जिसका हम सभी को पालन करना चाहिए, क्योंकि 'आत्म-प्रेम' और 'आत्म-देखभाल' जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से हैं।'

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