Chandigarh News : कंधों के दर्द और सर्जरी की बदलेगी दुनिया: चंडीगढ़ में जुटे देश के दिग्गज सर्जन
PGI डायरेक्टर ने बताया भविष्य का 'रोडमैप'
Chandigarh News : क्या आने वाले समय में कंधे की जटिल सर्जरी बिना किसी बड़े चीरे के और भी सटीक हो जाएगी? चंडीगढ़ के 'सिटी ब्यूटीफुल' में आज शुरू हुआ 'आईओआरए शोल्डर कॉन्क्लेव-2026' इसी सवाल का जवाब दे रहा है। पीजीआई चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. (डॉ.) विवेक लाल ने इस दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया और चिकित्सा क्षेत्र में आ रहे 'डिजिटल और तकनीकी इंकलाब' पर जोर दिया।
क्यों खास है यह कॉन्क्लेव?
ट्राईसिटी की ऑर्थ्रोप्लास्टी सोसाइटी (AST) के सहयोग से आयोजित इस समागम में देशभर के 180 से ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टर और युवा सर्जन जुटे हैं।
थीम: "कंधे की सर्जरी में तकनीकी नवाचार" (Technological Innovations in Shoulder Surgery)।
फोकस: आर्थ्रोस्कोपिक (दूरबीन विधि) और जॉइंट रिप्लेसमेंट की वो नई तकनीकें, जो कंधे के पुराने से पुराने दर्द और विकारों को जड़ से खत्म कर सकें।
प्रो. विवेक लाल ने कहा कि आज के दौर में केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है, बल्कि तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाना जरूरी है। उन्होंने विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने के लिए पीजीआई के ऑर्थोपेडिक विभाग की सराहना की।
वर्कशॉप: जब हड्डियों के मॉडल पर सर्जनों ने आजमाए हाथ
कॉन्क्लेव का सबसे रोमांचक हिस्सा रहा 'सॉ बोन मॉडल वर्कशॉप'। यहाँ जूनियर डॉक्टरों ने सिर्फ सुना नहीं, बल्कि खुद करके सीखा:
शोल्डर रिप्लेसमेंट: कैसे कंधे के जोड़ को कृत्रिम जोड़ से बदला जाता है।
रोटेटर कफ रिपेयर: फटी हुई मांसपेशियों को जोड़ने की बारीक तकनीक।
बाइसेप्स टेनोडेसिस: आधुनिक उपकरणों से सर्जरी का अभ्यास।
टीम ने संभाली कमान
इस बड़े आयोजन को सफल बनाने में पीजीआई के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजय जी. गोनी (चेयरमैन) की मुख्य भूमिका है। उनके साथ प्रो. समीर अग्रवाल, डॉ. आरती एस. दीवान, डॉ. दीपक कुमार और प्रो. पेबम सुदेश की टीम इस ज्ञान के महाकुंभ का संचालन कर रही है।
क्या है IORA? (एक नजर में)
यह 'इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन' की एक खास विंग है।
काम: हड्डियों और जोड़ों के दर्द (रूमेटोलॉजी) पर रिसर्च और नई पीढ़ी के डॉक्टरों को ट्रेनिंग देना।
लक्ष्य: भारत में कंधे के इलाज की गुणवत्ता को वैश्विक स्तर पर ले जाना।

