Chandigarh News : पीजीआई में सुरक्षा की नई रूपरेखा, दो साल में 24 करोड़ खर्च करेगी संस्था
284 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता; डीजीआर के जरिए आउटसोर्सिंग
Chandigarh News : देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) ने अपने परिसरों की सुरक्षा को नए सिरे से संगठित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मरीजों, तीमारदारों, डॉक्टरों और संस्थान की संपत्ति की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए पीजीआई प्रशासन ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ रिसेटलमेंट (DGR) के माध्यम से सुरक्षा सेवाओं की आउटसोर्सिंग के लिए दो वर्षों का लिमिटेड टेंडर जारी किया है। इस पूरी व्यवस्था पर अनुमानित 24 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
चंडीगढ़ के साथ संगरूर सैटेलाइट सेंटर भी सुरक्षा घेरे में
यह सुरक्षा अनुबंध केवल पीजीआई चंडीगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके अंतर्गत नेहरू अस्पताल एक्सटेंशन ब्लॉक, एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज सेंटर और पंजाब के संगरूर स्थित सैटेलाइट सेंटर को भी शामिल किया गया है। एक ही एजेंसी के जिम्मे पूरे नेटवर्क की सुरक्षा रहने से निगरानी व्यवस्था को अधिक समन्वित और प्रभावी बनाने की योजना है।
284 सुरक्षाकर्मी, संख्या में बदलाव की गुंजाइश
टेंडर शर्तों के अनुसार कुल 284 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती प्रस्तावित है। इनमें सुरक्षा सुपरवाइज़र, पुरुष सुरक्षा गार्ड और महिला सुरक्षा गार्ड शामिल होंगे। आवश्यकता पड़ने पर इस संख्या में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी या कटौती का अधिकार भी संस्थान के पास रहेगा, ताकि मौके की जरूरत के अनुसार सुरक्षा प्रबंध किए जा सकें।
अनुशासन और अनुभव पर जोर, पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता
नई सुरक्षा व्यवस्था में पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। अधिकांश तैनाती पूर्व सैनिकों की होगी, जबकि सीमित संख्या में गैर-ईएसएम कर्मियों को अनुमति दी जाएगी। महिला सुरक्षा गार्ड इस सीमा से अलग होंगी। प्रशासन का मानना है कि सैन्य पृष्ठभूमि वाले कर्मियों से अनुशासन, प्रशिक्षण और आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता मजबूत होगी।
24×7 एकीकृत सुरक्षा प्रणाली लागू होगी
चयनित एजेंसी को पीजीआई परिसर में 24 घंटे, सातों दिन एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था लागू करनी होगी। इसके तहत अस्पताल भवनों, उपकरणों, मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ की सुरक्षा के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण, अनुशासन बनाए रखना और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई जैसी जिम्मेदारियां शामिल होंगी।
इसके अलावा बायोमेट्रिक अटेंडेंस, शिफ्ट आधारित ड्यूटी और नियमित निगरानी प्रणाली भी अनिवार्य की गई है।
50 लाख रुपये ईएमडी, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाली सुरक्षा एजेंसियों के लिए 50 लाख रुपये की बिड सिक्योरिटी (ईएमडी) जमा करना अनिवार्य होगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 12 जून तय की गई है, जबकि तकनीकी बोलियां 13 जून को खोली जाएंगी।
सेवा शुल्क के आधार पर चयन
सुरक्षा एजेंसी का चयन सेवा शुल्क के आधार पर किया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है। यदि एक से अधिक एजेंसियां समान सेवा शुल्क प्रस्तावित करती हैं, तो वरिष्ठता के आधार पर एजेंसी को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है।
संवेदनशील संस्थान में सुरक्षा पर बढ़ता फोकस
पीजीआई जैसे बड़े और संवेदनशील चिकित्सा संस्थान में रोजाना हजारों मरीज और तीमारदार आते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और संस्थान की विश्वसनीयता से भी जुड़ा विषय है। नई आउटसोर्सिंग व्यवस्था से अव्यवस्था, अनधिकृत प्रवेश और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।

