Chandigarh News : पीजीआई की बड़ी उपलब्धि; लेपकॉन-2026 में दो शोधार्थियों को राष्ट्रीय सम्मान
एम्स पटना में आयोजित सम्मेलन में हिवांशी खेरा को प्रथम व मनजोत कौर को मिला दूसरा पुरस्कार
Chandigarh News : चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) के दो शोधार्थियों ने पटना में आयोजित 33वें द्विवार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन 'लेपकॉन-2026' (LEPCON) में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इंडियन एसोसिएशन ऑफ लेप्रोलॉजिस्ट्स (IAL) द्वारा एम्स पटना में आयोजित इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में पीजीआई के दो शोध पत्रों को शीर्ष सम्मान के लिए चुना गया।
कुष्ठ रोग के इलाज में नई राह
क्लीनिकल फार्माकोलॉजी यूनिट (फार्माकोलॉजी विभाग) की पीएचडी छात्रा हिवांशी खेरा ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार हासिल किया। उन्होंने प्रोफेसर नुसरत शफीक के मार्गदर्शन में 'मल्टीबैसिलरी लेप्रोसी' पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया था। उनके इस अध्ययन में उन रोगियों के लिए एक नए उपचार (बेडाक्विलिन-आधारित पद्धति) का मूल्यांकन किया गया, जिन पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानक एमडीटी दवाएं बेअसर साबित हो रही थीं। उनके इस 'प्रूफ-ऑफ-कांसेप्ट' अध्ययन को कुष्ठ रोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जीनोम अनुक्रमण पर शोध को सराहना
वहीं, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी विभाग की पीएचडी छात्रा मनजोत कौर ने सम्मेलन में द्वितीय पुरस्कार जीतकर संस्थान का गौरव बढ़ाया। उन्होंने डॉ. राकेश यादव के मार्गदर्शन में उत्तर भारत में 'माइकोबैक्टीरियम लेप्राई' के पूर्ण जीनोम अनुक्रमण (Whole Genome Sequencing) पर अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया। उनके इस शोध से क्षेत्र में कुष्ठ रोग के उपभेदों (strains) को समझने में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी मिली है।
बहुविषयक टीम का साझा प्रयास
यह सफलता पीजीआई के विभिन्न विभागों के साझा प्रयासों का परिणाम है। इस शोध कार्य में फार्माकोलॉजी, डर्मेटोलॉजी (त्वचा रोग), इम्यूनोपैथोलॉजी, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी और हिस्टोपैथोलॉजी विभागों की एक बहुविषयक टीम ने सहयोग किया।

