Chandigarh News : पीजीजीसी-11 में ‘सशक्त नारी समृद्ध समाज’ कार्यक्रम आयोजित
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में सेक्टर-11 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज (पीजीजीसी) में 'सशक्त नारी समृद्ध समाज' विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज की 'जेंडर इक्विटी एंड सेल्फ डिफेंस सोसाइटी' की पहल पर आयोजित इस...
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में सेक्टर-11 स्थित पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज (पीजीजीसी) में 'सशक्त नारी समृद्ध समाज' विषय पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज की 'जेंडर इक्विटी एंड सेल्फ डिफेंस सोसाइटी' की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की अलख जगाना था।
इस अवसर पर कॉलेज परिसर में छात्र-छात्राओं का उत्साह देखते ही बनता था। आयोजन समिति और शिक्षकों के विशेष सहयोग से यह कार्यक्रम महिला अधिकारों और सामाजिक चेतना का एक प्रमुख मंच बना।
रचनात्मकता और आत्मविश्वास का संगम
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित पोस्टर मेकिंग और कविता पाठ प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों ने समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके अधिकारों को कलात्मक रूप से प्रस्तुत किया। इन मुकाबलों में प्रतिभागियों ने न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी दर्शाई।
निर्णायक मंडल की भूमिका निभा रहीं डॉ. सोनिया कुमार और डॉ. पूनम ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और उनके आत्मविश्वास की मुक्त कंठ से सराहना की। इस अवसर पर उपस्थित अन्य शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया और उन्हें समाज में सकारात्मक बदलाव का संवाहक बनने की प्रेरणा दी।
प्रतियोगिताओं के परिणाम
विभिन्न श्रेणियों में आयोजित मुकाबलों के परिणाम इस प्रकार रहे:
पोस्टर मेकिंग: मानश्वी ने अपनी कला के दम पर प्रथम स्थान हासिल किया। ओम कुमारी द्वितीय और वैशाली तृतीय स्थान पर रहीं, जबकि वंशिका राठौर को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
कविता पाठ: अपनी ओजस्वी वाणी और प्रस्तुति से राघव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। साक्षी ने द्वितीय और अनन्या सिंह ने तृतीय स्थान पाया।
प्रगतिशील समाज की नींव है नारी शक्ति
कार्यक्रम का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। वक्ताओं ने जोर दिया कि महिलाओं का सर्वांगीण सशक्तिकरण ही एक प्रगतिशील और समृद्ध समाज की असली नींव है। बिना नारी शक्ति की सक्रिय और सम्मानजनक भागीदारी के किसी भी राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

