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Chandigarh Metro : 'क्वाड सिटीज' के लिए मेट्रो प्रोजेक्ट जरूरी, सांसद मनीष तिवारी बोले-इससे खुलेगा आर्थिक तरक्की का रास्ता

पंजाब और हरियाणा मिलकर बढ़ाएं कदम; सांसद ने मेट्रो को बताया आर्थिक तरक्की का 'मल्टीप्लायर', भविष्य की ट्रैफिक चुनौतियों पर चेताया

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Chandigarh Metro : चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला और न्यू चंडीगढ़ (क्वाड सिटीज) के लिए मास रैपिड ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MRTS) की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि यह मेट्रो परियोजना केवल शहरों को जोड़ने का साधन नहीं है, बल्कि यह इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला 'मर्केंटाइल मल्टीप्लायर' साबित होगी। तिवारी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट इन चारों शहरों की रचनात्मक और आर्थिक शक्ति को एक साथ लाने का काम करेगा।

भविष्य की चुनौतियों और ट्रैफिक का समाधान

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर अपनी बात रखते हुए मनीष तिवारी ने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया कि मेट्रो आने से चंडीगढ़ में बाहरी लोगों की भीड़ बढ़ जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में वास्तविक आर्थिक विकास चंडीगढ़ के मुख्य शहर के बजाय उसकी परिधि (Periphery) पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में स्थिति ऐसी होगी कि चंडीगढ़ के लोग काम के सिलसिले में पड़ोसी शहरों की ओर रुख करेंगे, न कि इसके उलट।

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वर्ष 2026 में चंडीगढ़ और उसके आसपास के ट्रैफिक की गंभीर स्थिति का जिक्र करते हुए सांसद ने सवाल उठाया कि अगर आज यह हाल है, तो 2036 तक परिस्थितियां कितनी चुनौतीपूर्ण हो जाएंगी।

अमेरिका के 'रिसर्च ट्रायंगल' से तुलना

मनीष तिवारी ने इस क्षेत्र के विकास की संभावनाओं की तुलना अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित 'रैले-डरहम-चैपल हिल' रिसर्च ट्रायंगल से की। उन्होंने तर्क दिया कि भारत की पश्चिमी सीमा निकट भविष्य में बंद रहने की संभावना है और इस क्षेत्र में कृषि या भारी उद्योग के लिए सीमित विकल्प हैं। ऐसे में मेट्रो प्रोजेक्ट इन चार शहरों को एक बड़े सर्विस और रिसर्च हब में बदल सकता है।

राज्यों के सहयोग पर जोर

सांसद ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि दोनों राज्य चंडीगढ़ पर अपना दावा पेश करते हैं, तो उन्हें इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए वित्तीय योगदान भी देना चाहिए। उन्होंने कहा, "पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को मिलकर इस मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए फंड देना चाहिए, जिसे राइट्स (RITES) ने दो बार व्यवहार्य (Feasible) पाया है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब समय केवल दावे करने का नहीं, बल्कि निवेश के जरिए इन शहरों को एक निर्बाध महानगरीय क्षेत्र (Metropolitan area) बनाने का है।

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