Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

Chandigarh Mandi License : चंडीगढ़ के मंडी व्यापारियों को बड़ी राहत, लाइसेंस के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव

मंडी लाइसेंस के नियमों में ऐसा क्या बदला, जिससे व्यापारियों के बचेंगे लाखों रुपये और दफ्तरों के चक्कर?

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Chandigarh Mandi License : क्या चंडीगढ़ में अब मंडी का लाइसेंस लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने जा रहा है? क्या व्यापारियों को भारी-भरकम बैंक गारंटी और कैश सिक्योरिटी के झंझट से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है? जवाब है- हां। चंडीगढ़ प्रशासन ने कृषि व्यापार को बढ़ावा देने और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसने मंडी कारोबारियों की बरसों पुरानी राह आसान कर दी है।

प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने राज्य कृषि विपणन बोर्ड के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसके तहत लाइसेंस प्रक्रिया से सिक्योरिटी डिपॉजिट की शर्त को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। प्रशासन के इस फैसले के बाद चंडीगढ़ विपणन बोर्ड ने पंजाब मंडी बोर्ड की तर्ज पर पंजाब कृषि उपज बाजार नियम, 1962 के नियम 17 और 21 में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी है।

Advertisement

क्यों खत्म की गई बैंक गारंटी और कैश सिक्योरिटी?

Advertisement

अक्सर नए व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाइसेंस लेते समय मोटी रकम बैंक गारंटी या नकद सुरक्षा राशि के रूप में जमा करने की होती थी। इस व्यवस्था से न सिर्फ व्यापारियों का पैसा ब्लॉक रहता था, बल्कि कागजी कार्रवाई में भी लंबा वक्त जाया होता था। अब संशोधित नियमों के तहत आवेदकों को ऐसी किसी भी गारंटी से छूट दे दी गई है। बोर्ड का मानना है कि इस कदम से व्यापारियों पर वित्तीय बोझ घटेगा और मंडी में पारदर्शिता के साथ नया निवेश और प्रतियोगिता बढ़ेगी।

लाइसेंस रिन्यू कराने का झंझट खत्म, अब सीधे 10 साल की वैधता

इस सुधार में व्यापारियों के लिए एक और बड़ा सरप्राइज छिपा है। क्या आप जानते हैं कि जो लाइसेंस पहले महज 3 साल के लिए मिलता था, उसकी म्याद अब कितनी होगी? नए नियमों के तहत पंजाब कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1961 की धारा 10 के तहत जारी होने वाले लाइसेंस की वैधता को बढ़ाकर सीधे 10 साल कर दिया गया है।

अब व्यापारियों को हर तीसरे साल दफ्तरों की दौड़ भाग और रिन्यूअल की जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। एक बार लाइसेंस बनने के बाद वे पूरे एक दशक तक बेफिक्र होकर अपना व्यापार कर सकेंगे। बोर्ड के अनुसार, इन बदलावों से चंडीगढ़ के कृषि विपणन ढांचे को नई मजबूती मिलेगी।

Advertisement
×