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Chandigarh Bus Safety: चंडीगढ़ की लग्जरी बसों में सुरक्षा से खिलवाड़, मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

इमरजेंसी दरवाजे सील, निकास के सामने लगाई दो अतिरिक्त सीटें; 2022 में एक्सपायर हो चुके थे दोनों फायर सिलेंडर

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सांकेतिक
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चंडीगढ़ सेक्टर-43 बस टर्मिनल से पंजाब के विभिन्न शहरों के लिए चलने वाली लग्जरी बसों में यात्रियों की सुरक्षा से गंभीर खिलवाड़ का मामला सामने आया है। पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ (यूटी) मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए परिवहन विभाग से रिपोर्ट तलब की है।

आयोग के सदस्य एवं पद्मश्री से सम्मानित जितेंद्र सिंह शुंटी ने 10 अगस्त को सुबह करीब सात बजे सेक्टर-43 बस टर्मिनल का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान पंजाब के विभिन्न शहरों के लिए चलने वाली लग्जरी बसों की जांच में कई गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आईं।

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निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जिन लग्जरी बसों की जांच की गई, उनमें पीछे के आपातकालीन दरवाजे स्थायी रूप से बंद या सील किए गए थे। इतना ही नहीं, अतिरिक्त यात्रियों को बैठाने के लिए आपातकालीन निकास के ठीक सामने दो अतिरिक्त सीटें भी लगा दी गई थीं।

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58 यात्रियों के लिए एक ही निकास का जोखिम

आयोग के आदेश के अनुसार, आपातकालीन निकास को बंद कर केवल एक दरवाजे से यात्रियों की निकासी की व्यवस्था बेहद खतरनाक है। अचानक आग लगने या किसी अन्य आपात स्थिति में इससे भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती है और बस में सवार सभी 58 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना लगभग असंभव हो सकता है।

जांच के दौरान बसों में लगे दोनों अग्निशमन सिलेंडर भी 2022 में ही एक्सपायर पाए गए। आयोग ने इसे यात्रियों के जीवन के लिए गंभीर खतरा माना है।

‘अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार के खिलाफ’

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि अतिरिक्त सीटें लगाने के लिए आपातकालीन निकास को अवरुद्ध करना और एक्सपायर अग्निशमन उपकरणों के साथ यात्रियों को ले जाना परिवहन संचालकों और निगरानी करने वाले अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

आयोग ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था सीधे तौर पर मानव जीवन को खतरे में डालती है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और सुरक्षा के मौलिक अधिकार के लिए गंभीर खतरा है।

परिवहन विभाग से एक सप्ताह पहले मांगी रिपोर्ट

पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति संत प्रकाश, सदस्य न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह और सदस्य जितेंद्र सिंह शुंटी की पीठ ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ यूटी के परिवहन सचिव और पंजाब के राज्य परिवहन नियंत्रक से रिपोर्ट मांगी है।

दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 को होगी।

आयोग ने अपने आदेश की प्रति शिकायत के साथ चंडीगढ़ के परिवहन सचिव और पंजाब के राज्य परिवहन नियंत्रक को ई-मेल और डाक के माध्यम से भेजने के निर्देश भी दिए हैं।

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