चंडीगढ़ ITI की जर्जर इमारत पर खतरा, 920 छात्रों और 100 स्टाफ की सुरक्षा पर सवाल
सेक्टर-28 स्थित सरकारी ITI की हालत खस्ताहाल; पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने गवर्नर से की शिकायत, चीफ इंजीनियर ने किया निरीक्षण, टीचर्स ने 5 करोड़ रुपये के इंश्योरेंस की मांग उठाई
चंडीगढ़ के सेक्टर-28 स्थित गवर्नमेंट आईटीआई की जर्जर इमारत को लेकर छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इमारत की हालत ऐसी बताई जा रही है कि किसी भी समय हादसा होने की आशंका बनी हुई है। परिसर में करीब 920 छात्र अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि लगभग 100 टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ रोजाना यहां मौजूद रहता है। जर्जर भवन के कारण टीचर्स और छात्रों में डर का माहौल है।
मामले को लेकर पार्षद हरप्रीत कौर बबला ने गवर्नर से शिकायत कर आईटीआई भवन की स्थिति से अवगत कराया है। इसके बाद चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने आईटीआई परिसर का दौरा कर भवन की स्थिति और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का जायजा लिया।
जर्जर भवन के बीच फर्श और साइकिल स्टैंड की मरम्मत पर सवाल
आईटीआई की इमारत की हालत को लेकर चिंता के बीच परिसर में फर्श डालने और अन्य निर्माण कार्य कराए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि कोटा स्टोन लगाने के लिए करोड़ों रुपये का टेंडर किया गया है। वहीं, साइकिल स्टैंड की रिपेयरिंग के साथ वहां टाइलें लगाने का काम भी चल रहा है।
टीचर्स का कहना है कि जब भवन की सुरक्षा को लेकर ही गंभीर आशंका बनी हुई है और इसे कभी भी गिरने का खतरा बताया जा रहा है, तो पहले इमारत को मजबूत करने की जरूरत है। उनका सवाल है कि यदि भवन की स्थिति नहीं सुधारी गई तो उस पर करोड़ों रुपये खर्च कर नया फर्श और अन्य सुविधाएं तैयार करने का क्या औचित्य है।
टीचर्स ने मांग की है कि सबसे पहले जर्जर भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच कराकर उसे मजबूत किया जाए, ताकि छात्र और स्टाफ बिना किसी डर के परिसर में आ सकें।
टीचर्स ने मांगा 5 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस
टीचर्स ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए 5 करोड़ रुपये के इंश्योरेंस की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि रोजाना सैकड़ों छात्र और करीब 100 कर्मचारी ऐसी इमारत में समय बिताते हैं, जिसकी स्थिति को लेकर उन्हें लगातार डर बना रहता है।
टीचर्स का कहना है कि किसी भी हादसे की स्थिति में बड़ी संख्या में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में प्रशासन को फर्श, टाइल और अन्य सौंदर्यीकरण कार्यों से पहले भवन की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा का
आईटीआई परिसर में बड़ी संख्या में छात्र प्रशिक्षण लेते हैं। ऐसे में जर्जर भवन की स्थिति को लेकर सबसे बड़ा सवाल 920 छात्रों और करीब 100 टीचिंग व नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की सुरक्षा का है। अब चीफ इंजीनियर के निरीक्षण के बाद यह देखना अहम होगा कि भवन की संरचनात्मक स्थिति पर क्या रिपोर्ट सामने आती है और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

