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Chandigarh News : चंडीगढ़ प्रशासन का अहम फैसला; अस्पतालों में दिव्यांगों को मिलेगी प्राथमिकता, बनेंगे अलग काउंटर और फास्ट-ट्रैक लेन

प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए निर्देश; जीएमसीएच-32 और जीएमएसएच-16 सहित सभी आयुष डिस्पेंसरियों में लागू होगी व्यवस्था

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Chandigarh News : चंडीगढ़ प्रशासन ने दिव्यांगजनों (PwD) के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और समान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को दिव्यांग जन अधिकार (RPwD) अधिनियम, 2016 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से अधिनियम की धारा 25 पर विशेष जोर दिया गया है, जो अस्पतालों में दिव्यांगों को इलाज और अन्य सुविधाओं में प्राथमिकता देने को अनिवार्य बनाती है।

यह नई व्यवस्था चंडीगढ़ के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, जिनमें गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच-32), गवर्नमेंट मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल (जीएमएसएच-16) और शहर की सभी आयुष डिस्पेंसरियां शामिल हैं, में तुरंत प्रभाव से लागू की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल आने वाले दिव्यांग मरीजों को लंबी लाइनों या किसी अन्य परेशानी का सामना न करना पड़े।

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मरीजों के लिए विशेष काउंटर और फास्ट-ट्रैक सुविधाएं

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प्रशासन की नई गाइडलाइंस के अनुसार, अस्पतालों में सभी अहम पॉइंट्स पर दिव्यांगों के लिए समर्पित प्राथमिकता काउंटर और फास्ट-ट्रैक लेन बनाई जाएंगी। इसमें पर्ची बनवाने (पंजीकरण), ओपीडी और आईपीडी परामर्श, टेस्ट व डायग्नोस्टिक सेवाएं, दवा काउंटर (फार्मेसी), बिलिंग और आपातकालीन देखभाल शामिल हैं। मरीजों को सही जानकारी देने के लिए प्रवेश द्वारों, प्रतीक्षा क्षेत्रों, सर्विस काउंटरों और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सिस्टम में स्पष्ट साइनेज, पोस्टर और डिजिटल नोटिस भी लगाए जाएंगे।

स्टाफ को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण

अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के साथ सही और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए फ्रंटलाइन स्टाफ को संवेदनशील बनाया जाएगा। इसके लिए रिसेप्शनिस्ट, नर्सों, सुरक्षा कर्मियों, फार्मासिस्टों और डॉक्टरों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि मरीजों को बिना किसी देरी के त्वरित सेवा मिल सके। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन नियमों का सही तरीके से पालन हो, इसके लिए नियमित रूप से आंतरिक ऑडिट किए जाएंगे। मरीजों के फीडबैक के लिए एक तंत्र विकसित किया जाएगा और किसी भी तरह की कोताही से जुड़ी शिकायतों का तुरंत समाधान किया जाएगा।

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