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Chandigarh Fire Safety चंडीगढ़ में अग्नि सुरक्षा से जुड़े जुर्माने में भारी वृद्धि

कई धाराओं में जुर्माना 10 हजार रुपये से बढ़कर 1 लाख रुपये तक हुआ

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केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में ‘हरियाणा अग्निशमन और आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022’ लागू किए जाने के बाद शहर में अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले जुर्माने में कई गुना बढ़ोतरी हो गई है।

विभिन्न धाराओं के तहत पहले जो जुर्माना 10,000 रुपये तय था, उसे अब बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है। धारा 25 के तहत, अग्निशमन अभियान के दौरान बिना अनुमति के पानी लेने पर जुर्माना 50,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है। धारा 26 के तहत, अग्नि सुरक्षा अधिकारी (फायर सेफ्टी ऑफिसर) नियुक्त न करने पर लगने वाली फीस पहले के 10 से 50 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर अब 100 से 200 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी गई है।

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धारा 29, 30 और 31 के तहत आने वाले अपराध—जैसे आग की झूठी रिपोर्ट देना, अधिनियम का सामान्य उल्लंघन और कंपनियों द्वारा किए गए अपराध—में पहले तीन महीने तक की जेल, 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। साथ ही, उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन का अतिरिक्त जुर्माना भी था। इस विस्तारित अधिनियम के तहत, अब इनमें केवल कैश जुर्माना रह गया है, जो अधिकतम 1 लाख रुपये तक हो सकता है। ‘पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966’ की धारा 87 के तहत जारी यह अधिसूचना ‘दिल्लीअग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम, 1986’ की जगह लेगी, जो अब तक चंडीगढ़ में लागू थी।

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फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र) की वैधता में भी बदलाव किया गया है। मूल हरियाणा अधिनियम के तहत, बहुमंजिला और विशेष इमारतों के लिए प्रमाणपत्र तीन साल और 16.5 मीटर से अधिक ऊंची आवासीय इमारतों के लिए पांच साल के लिए वैध थे। अब संशोधित अधिनियम के तहत, नए प्रमाणपत्र और नवीनीकरण (रिन्यूअल) दोनों के लिए सभी कवर्ड इमारतों की वैधता समान रूप से पांच साल होगी।

नियम अभी तक नहीं बने, एनओसी और रिन्यूअल लटके

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि नियमों के लंबित होने के कारण शहर के संस्थानों और को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसायटियों को अनापत्ति प्रमाणपत्र और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने व उनका नवीनीकरण करने में देरी हो रही है। एक को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के प्रवक्ता बलजीत बल्ली ने बताया कि उनकी सोसाइटी का फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट रिन्यूअल नवंबर से लंबित है। सर्टिफिकेट न मिलने के कारण सोसाइटी का कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी अटक गया है। उन्होंने चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से अपील की कि वे अधिकारियों को इस पेंडेंसी को जल्द खत्म करने के निर्देश दें।

क्या कहते हैं प्रशासक

इस बीच, जब ‘द ट्रिब्यून’ ने प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को नियमों को तैयार करने सहित नए अधिनियम के कार्यान्वयन को जल्द पूरा करने और लंबित मामलों को निपटाने का निर्देश दिया है।

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