Chandigarh Crime : कमीशन का 'शॉर्टकट' ले गया सलाखों के पीछे, साइबर ठगों के लिए पलक-पांवड़े बिछाने वाले 2 युवक मलोट से गिरफ्तार
बैंक खाते में ठगी के 12 लाख 10 हजार रुपये आए थे
कहते हैं कि लालच की जड़ बहुत गहरी होती है और जब यह लालच 10 प्रतिशत कमीशन का हो, तो अच्छे-खासे युवा भी कानून की नजरों में गुनहगार बन जाते हैं। ऐसा ही एक मामला चंडीगढ़ पुलिस के साइबर सेल ने सुलझाया है। पुलिस ने पंजाब के मलोट (श्री मुक्तसर साहिब) में छापेमारी कर दो ऐसे युवकों को दबोचा है, जो बैंक धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के लिए अपने खाते किराए पर उपलब्ध कराते थे। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गांव कोलिंवाली निवासी 30 वर्षीय मनिंदर सिंह और 28 वर्षीय बलजीत सिंह के रूप में हुई है। यह कार्रवाई सेक्टर-17 साइबर थाना पुलिस ने पिछले साल दर्ज हुई एक बड़ी धोखाधड़ी (FIR No. 56) की जांच को आगे बढ़ाते हुए की है।
12 लाख का ट्रांजेक्शन और 10% का 'कट'
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मनिंदर सिंह के बैंक खाते में ठगी के 12 लाख 10 हजार रुपये आए थे। मनिंदर ने पुलिस को बताया कि उसे बलविंदर उर्फ बिंदु और बलजिंदर नाम के व्यक्तियों ने झांसा दिया था। उसे सिर्फ इतना करना था कि अपने खाते में आई रकम को एटीएम या चेक के जरिए निकालकर उन्हें सौंपना था। इस काम के बदले उसे कुल रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा मिलना था। इसी तरह, दूसरे आरोपी बलजीत सिंह ने भी 4.70 लाख रुपये की हेराफेरी में मदद की और अपना कमीशन जेब में डाला।
सिम री-एक्टिवेशन से उड़ाई जाती थी रकम
साइबर सेल के मुताबिक, यह गिरोह साधारण नहीं है। ये ठग 'सिम री-एक्टिवेशन' और 'नेट बैंकिंग कंप्रोमाइज' जैसे तकनीकी हथकंडे अपनाकर लोगों के खातों तक पहुंच बनाते थे। पुलिस की टीम, जिसमें एसपी साइबर क्राइम और डीएसपी के नेतृत्व में एसएचओ साइबर सेल शामिल थे, ने तकनीकी सर्विलांस (मोबाइल लोकेशन और बैंक रिकॉर्ड) के जरिए मलोट में इन आरोपियों के ठिकाने का पता लगाया। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कुल पांच गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे पहले पुलिस की टीम राजस्थान और हरियाणा के सिरसा से तीन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड बलविंदर और बलजिंदर की तलाश में छापेमारी कर रही है।
क्या करें और क्या न करें: पुलिस का 'अलर्ट'
चंडीगढ़ पुलिस ने इस गिरफ्तारी के साथ ही जनता के लिए एक जरूरी सलाह भी जारी की है:
सावधानी: कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में पैसा न मंगवाएं और न ही निकालकर उन्हें दें। यह
'मनी लॉन्ड्रिंग' और साइबर अपराध की श्रेणी में आता है।
गोपनीयता: अपना ओटीपी, पिन या नेट बैंकिंग का पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
शिकायत: यदि आपके साथ या आपके खाते में कोई संदिग्ध गतिविधि होती है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।

