Chandigarh Cab Strike : उबर-रैपिडो के लाइसेंस निलंबित, कैब चालकों की 100 दिन की हड़ताल खत्म, यात्रियों को राहत की उम्मीद
उबर-रैपिडो पर कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ कैब यूनियन ने समाप्त किया धरना, बीमा और स्थानीय कार्यालय की मांगें लंबित
Chandigarh Cab Strike : उबर और रैपिडो के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किए जाने के एक दिन बाद चंडीगढ़ कैब यूनियन ने बुधवार को 100 दिन से जारी हड़ताल और धरना समाप्त कर दिया। इससे कैब सेवाओं पर निर्भर यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। यूनियन ने एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई को अपनी प्रमुख मांग बताया था।
यूनियन अध्यक्ष अमनदीप सिंह ने कहा कि बुधवार को धरने का 100वां दिन और भूख हड़ताल का 16वां दिन था। उन्होंने कहा कि एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पूरी हो गई है। हालांकि, चालकों के लिए 6 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस, 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस और एग्रीगेटर कंपनियों के चंडीगढ़ में 24 घंटे चालू रहने वाले स्थानीय कार्यालय की मांग अब भी लंबित है। यूनियन करीब एक साल तीन महीने से मेडिकल इंश्योरेंस की मांग उठा रही थी।
राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) के सचिव नितीश सिंगला ने 8 सितंबर को उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड और रैपिडो की संचालक रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किए थे। यह कार्रवाई चंडीगढ़ प्रशासन मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स रूल्स, 2025 के नियम 17 के तहत की गई।
नियमों के उल्लंघन का आदेश में उल्लेख
आदेश में चालकों को अनिवार्य स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस नहीं देने, अधिसूचित किराया लागू नहीं करने, यात्रियों से अधिक किराया वसूलने, जबरन सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाने और मई 2026 में निरीक्षण के दौरान स्थानीय कार्यालय बंद मिलने का उल्लेख है।
इससे पहले जून में ओला और अगस्त में इनड्राइव के लाइसेंस भी छह महीने के लिए निलंबित किए गए थे। उबर और रैपिडो पर कार्रवाई के बाद शहर में चारों प्रमुख कैब एग्रीगेटर के लाइसेंस निलंबित हो चुके हैं। भारत टैक्सी अब शहर में संचालित होने वाला एकमात्र प्रमुख ऐप-आधारित कैब प्लेटफॉर्म रह गया है।
‘लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई’
अमनदीप सिंह ने कहा कि यूनियन ने एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की थी। उन्होंने उबर और रैपिडो की सेवाएं चंडीगढ़ में बंद करने की मांग की थी। सिंह ने चारों कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन का आभार जताया, लेकिन कहा कि आंदोलन की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि 6 लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस, 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस और एग्रीगेटर कंपनियों के 24 घंटे चालू रहने वाले स्थानीय कार्यालय की मांग अभी बाकी है। धरना समाप्त कर दिया गया है, लेकिन इन मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। एसटीए ने लाइसेंस निलंबन की समीक्षा के लिए फिलहाल कोई समयसीमा तय नहीं की है।

