Chandigarh Alert : चंडीगढ़ में गर्मी को लेकर चौंकाने वाली खुलासा, 33.8 डिग्री पार करते ही बढ़ सकता है जान का जोखिम
चंडीगढ़ में वैज्ञानिकों ने पहली बार खींच दी ‘लाल रेखा’- 33.8 डिग्री पार होते ही बढ़ जाता है जान का जोखिम
Chandigarh News : क्या आपने कभी सोचा है कि चंडीगढ़ में वह एक सटीक तापमान कौन-सा है, जिसके बाद गर्मी जानलेवा बनने लगती है? अब इसका जवाब सामने आ गया है। एक वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि जैसे ही शहर का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस को पार करता है, दैनिक मौतों की संख्या में तुरंत और लगातार बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। यह महज संयोग नहीं, बल्कि ठोस आंकड़ों से निकला निष्कर्ष है।
यह अध्ययन पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च और पंजाब विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल Nature Scientific Reports में प्रकाशित किया गया है।
क्यों चौंकाता है यह अध्ययन?
अब तक लू और गर्मी को लेकर चेतावनियां सामान्य शब्दों में दी जाती थीं। यह शोध पहली बार बताता है कि “कितनी गर्मी” खतरनाक है—और उसकी एक साफ सीमा तय करता है।
असली मौतों के आंकड़ों से निकला सच
शोध वर्ष 2010 से 2015 के बीच चंडीगढ़ में दर्ज हर दिन की वास्तविक मौतों और तापमान के आंकड़ों पर आधारित है। अध्ययन का नेतृत्व डॉ. रविंद्र खैवाल, प्रोफेसर, सामुदायिक चिकित्सा एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने किया। वैज्ञानिकों ने उन्नत सांख्यिकीय पद्धति का इस्तेमाल कर यह देखा कि तापमान बढ़ने पर किस बिंदु से मौतों का ग्राफ ऊपर उठने लगता है।
33.8 डिग्री: आंकड़ों ने बता दी खतरे की सीमा
अध्ययन के अनुसार, 33.8 डिग्री सेल्सियस पार होते ही चंडीगढ़ में दैनिक कुल मृत्यु दर औसतन 4.1 प्रतिशत बढ़ जाती है यानि यह तापमान पार होना एक चेतावनी नहीं, बल्कि जोखिम की शुरुआत है।
सबसे ज्यादा खतरे में कौन?
शोध में सामने आया कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग इस गर्मी में सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। इनमें लू से मौत का खतरा करीब डेढ़ गुना अधिक है पुरुष–महिला: फर्क कम, खतरा बराबर। अध्ययन बताता है कि पुरुषों में औसतन 9 मौतें प्रतिदिन, महिलाओं में 6 मौतें प्रतिदिन दर्ज हुईं लेकिन लू के दौरान मृत्यु जोखिम दोनों में लगभग समान बढ़ा।
नीति बनाने वालों के लिए सीधा संदेश
पंजाब विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुमन मोर के अनुसार, यह अध्ययन प्रशासन के लिए आंख खोलने वाला है। उनका कहना है कि अब लू से निपटने की रणनीति अनुमान नहीं, डेटा तय करे और योजनाएं वार्ड स्तर पर लागू हों ताकि बुजुर्गों और संवेदनशील आबादी को समय रहते बचाया जा सके।
निष्कर्ष
सीधा सवाल—किस तापमान पर खतरा शुरू होता है?
जवाब साफ है—33.8 डिग्री सेल्सियस।
अब यह आंकड़ा सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन, नीति-निर्माताओं और आम लोगों—सभी के लिए चेतावनी है। अगर इस सीमा को नजरअंदाज किया गया, तो चंडीगढ़ में गर्मी हर साल ज्यादा जानलेवा साबित हो सकती है।

