कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर में पहली बार दी गई CAR-T सेल थेरेपी
16 वर्षीय मरीज में रिलैप्स्ड रिफ्रैक्टरी बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया का उपचार; आर्मी अस्पताल आरएंडआर, दिल्ली के बाद यह सुविधा शुरू करने वाला पहला कमांड हॉस्पिटल
CAR-T Cell Therapy: सैन्य स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अहम उपलब्धि हासिल करते हुए कमांड हॉस्पिटल (वेस्टर्न कमांड), चंडीमंदिर के हेमेटोलॉजी विभाग में 16 वर्षीय मरीज को पहली बार CAR-T सेल थेरेपी दी गई। मरीज रिलैप्स्ड रिफ्रैक्टरी बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया से पीड़ित है। अस्पताल के अनुसार, आर्मी हॉस्पिटल (आरएंडआर), दिल्ली के अलावा यह उन्नत सेलुलर थेरेपी उपलब्ध कराने वाला पहला कमांड हॉस्पिटल है।
CAR-T सेल थेरेपी में मरीज के अपने टी-सेल्स को शरीर से निकालकर उनमें काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर (CAR) डाला जाता है। इसके बाद इन जेनेटिकली मॉडिफाइड कोशिकाओं को मरीज के शरीर में वापस पहुंचाया जाता है। ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन पर हमला करने में सक्षम होती हैं। यह उपचार खास तौर पर रिलैप्स्ड या रिफ्रैक्टरी ब्लड कैंसर के कुछ मरीजों के लिए उपचार का विकल्प है।
नौ सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद सेलुलर थेरेपी की दिशा में कदम
अस्पताल के मुताबिक, यह उपलब्धि सशस्त्र बलों की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में जटिल ब्लड कैंसर के उपचार के लिए स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कमांड हॉस्पिटल के हेमेटोलॉजी सेंटर ने स्थापना के बाद से मल्टी-डिसिप्लिनरी कार्यक्रम विकसित किया है। सेंटर में अब तक नौ सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं और इसके बाद सेलुलर थेरेपी की सुविधा शुरू की गई है।
कमांड हॉस्पिटल (वेस्टर्न कमांड) के कमांडेंट मेजर जनरल हरकिरत सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि हाल ही में स्थापित हेमेटोलॉजी सेंटर की लगातार क्लिनिकल कोशिशों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सेंटर ने स्थापना के बाद से नौ सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए हैं और नई उपलब्धि ने इसे एडवांस्ड सेलुलर थेरेपी के क्षेत्र में आगे बढ़ाया है।
अस्पताल के अनुसार, यह उपलब्धि भारतीय सेना की आधुनिक मेडिकल तकनीक अपनाने, विशेषज्ञ क्लिनिकल क्षमताओं को बढ़ाने और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

