Autism Awareness : PGI में ऑटिज्म जागरूकता कार्यक्रम, केयरगिवर स्टोरी सर्कल में माताओं ने साझा की पीड़ा; भावुक हुए लोग
डीन डॉ. संजय जैन बोले- क्लिनिक से बाहर समझना होगा यह दर्द
Autism Awareness : अपने ऑटिज्म पीड़ित बच्चे को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए एक मां हर दिन नई जंग लड़ती है। इन बच्चों को इलाज से ज्यादा समाज के साथ और संबल की जरूरत है। गुरुवार को पीजीआई (PGIMER) चंडीगढ़ के बाल रोग विभाग की ओर से आयोजित विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस कार्यक्रम में कुछ ऐसा ही दर्द छलक कर सामने आया।
'ऑटिज्म बियॉन्ड द क्लिनिक : लिव्ड एक्सपीरियंसेज ऑफ फैमिलीज थ्रू ए सोशल पीडियाट्रिक्स लेंस' थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पीजीआई के डीन डॉ. संजय जैन ने कहा कि हमें क्लिनिक से बाहर निकलकर इन परिवारों का दर्द समझना होगा। ऑटिज्म की शीघ्र पहचान और समावेशी शिक्षा ही इसका एकमात्र समाधान है।
माताओं ने साझा की दर्द भरी कहानियां
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल 'वॉयस ऑफ ऑटिज्म' पेरेंट एंड केयरगिवर स्टोरी सर्कल रहा। यहां माताओं और देखभाल करने वालों ने अपने संघर्ष की दास्तां सुनाई। माताओं ने बताया कि लगातार थेरेपी और आर्थिक तंगी से निपटना तो फिर भी संभव है, लेकिन समाज जब उनके बच्चों को अजीब नजरों से देखता है, तो उनका दिल टूट जाता है।
इस दौरान रोटरी क्लब चंडीगढ़ की अध्यक्ष आभा शर्मा जोशी, चंडीगढ़ सिटीजन फाउंडेशन से कर्नल (डॉ.) देव, प्रो. अंबुज, सेंट जॉन्स हाई स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल व जीडी गोयनका स्कूल मोहाली की वर्तमान डायरेक्टर प्रिंसिपल कविता दास, प्राइमरी स्कूल टीचर नेहा और भवन विद्यालय के स्पेशल सेल की प्रमुख गीता सहित कई लोग इन संघर्षों को सुनकर भावुक नजर आए।
पीजीआई में जन्मे युवा ने बढ़ाया हौसला
आंसुओं और संघर्ष की इन कहानियों के बीच एक उम्मीद की किरण भी नजर आई। पीजीआई में ही जन्मे ऑटिज्म से पीड़ित एक युवा ने मंच से अपनी सफलता की कहानी साझा की। आज वह 'क्रिकेट की आवाज' नाम से यूट्यूब चैनल चलाता है। उसने बेबाकी से लोगों के सवालों के जवाब देने और दोस्ती करने की इच्छा जताई। इस युवा की जिंदादिली ने कार्यक्रम में मौजूद हर मां के दिल में एक नई आस जगा दी।
विविधता का मनाया जश्न
विशेषज्ञों ने भी माना कि ऑटिज्म को केवल क्लिनिक तक सीमित नहीं रखा जा सकता। कार्यक्रम के अंत में सभी ने मिलकर विविधता का जश्न मनाते हुए केक काटा। रोटरेक्ट क्लब एम्स (AIMS) मोहाली के सदस्यों ने भी एक समावेशी समाज बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।

