Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

उन्नत आईवीयूएस तकनीक से सीकेडी पीड़ित बुजुर्ग को नया जीवन

क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (सीकेडी) से जूझ रहे 80 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के लिए जटिल हृदय उपचार एक बड़ी चुनौती था, लेकिन आधुनिक इन्ट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवीयूएस) तकनीक ने यह चुनौती आसान कर दी। फोर्टिस अस्पताल, मोहाली में कार्डियोलॉजिस्ट्स की टीम ने...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ (सीकेडी) से जूझ रहे 80 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के लिए जटिल हृदय उपचार एक बड़ी चुनौती था, लेकिन आधुनिक इन्ट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवीयूएस) तकनीक ने यह चुनौती आसान कर दी। फोर्टिस अस्पताल, मोहाली में कार्डियोलॉजिस्ट्स की टीम ने अल्ट्रा-लो कॉन्ट्रास्ट एंजियोप्लास्टी के जरिए सफल उपचार कर मरीज की जान बचाई। इलाज के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही और उसे तीन दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

मरीज पिछले पांच वर्षों से सीकेडी से पीड़ित था। अस्पताल पहुंचने पर उसका क्रिएटिनिन स्तर काफी बढ़ा हुआ था और उसे सीने में तेज दर्द, सांस की तकलीफ तथा कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ की शिकायत थी। चिकित्सकों के अनुसार, ऐसे मामलों में पारंपरिक एंजियोप्लास्टी किडनी के लिए गंभीर खतरा बन सकती है, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली कॉन्ट्रास्ट डाई से किडनी की कार्यक्षमता और बिगड़ने की आशंका रहती है।

Advertisement

इस जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों ने अल्ट्रा-लो कॉन्ट्रास्ट तकनीक को आईवीयूएस इमेजिंग के साथ अपनाया। इस विधि में बेहद कम मात्रा में डाई का उपयोग किया जाता है, जिससे रक्त वाहिकाओं में रुकावटों का सटीक आकलन संभव हो सका और किडनी को अतिरिक्त नुकसान से बचाया गया। उपचार के दौरान डायलिसिस की संभावित जरूरत भी टल गई।

Advertisement

सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉ. सुधांशु बुडाकोटी ने बताया कि आईवीयूएस तकनीक के माध्यम से रक्त वाहिकाओं की आंतरिक संरचना, संकुचित हिस्सों की स्थिति और स्टेंट की सटीक पोजिशन स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। इससे इलाज अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनता है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनमें किडनी जैसी गंभीर सह-बीमारियां मौजूद हों।

Advertisement
×