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एक्शन मोड में प्रशासक कटारिया: GMCH-32 और SPCA की व्यवस्थाएं जांची, आक्रामक कुत्तों के प्रबंधन के लिए SOP के निर्देश

प्रशासक के औचक दौरे से महकमों में खलबली, सेक्टर-31 स्थित ग्रुप होम की पुनर्वास सेवाओं की भी समीक्षा की

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Chandigarh News : पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया गुरुवार को शहर की स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए अचानक फील्ड में उतरे। उन्होंने सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH-32), सेक्टर-31 के ग्रुप होम और सेक्टर-38 स्थित पशु अस्पताल (SPCA) का औचक निरीक्षण किया। प्रशासक के इस 'सरप्राइज विजिट' से प्रशासनिक अमले में पूरे समय अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। कटारिया ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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GMCH-32: इमरजेंसी में मरीजों के बीच पहुंचे प्रशासक

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प्रशासक ने अपने दौरे की शुरुआत जीएमसीएच-32 के इमरजेंसी और ट्रॉमा ब्लॉक से की। उन्होंने यहां के ट्रायेज, सर्जिकल, मेडिसिन और बाल रोग आपातकालीन वार्डों का बारीकी से निरीक्षण किया। कटारिया ने बेड पर लेटे मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधा संवाद किया और अस्पताल की सुविधाओं पर फीडबैक लिया। मरीजों के संतोषजनक जवाब के बाद उन्होंने ब्लड कलेक्शन सेंटर और अल्ट्रासाउंड रूम की व्यवस्था भी देखी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि आपातकालीन सेवाओं में किसी भी मरीज को इंतजार न करना पड़े।

ग्रुप होम: पुनर्वास सेवाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश

इसके बाद प्रशासक सेक्टर-31 स्थित ग्रुप होम पहुंचे, जो मानसिक बीमारियों और ऑटिज़्म से पीड़ित व्यक्तियों की देखभाल के लिए समर्पित है। उन्होंने वहां रहने वाले निवासियों और स्टाफ से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना। कटारिया ने संस्थान के सुरक्षित वातावरण की सराहना की और अधिकारियों से कहा कि इस सुविधा का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए 'आउटरीच' और जागरूकता अभियान चलाया जाए।

SPCA-38: बेजुबानों की फिक्र और सुरक्षा पर जोर

निरीक्षण के अंतिम चरण में कटारिया सेक्टर-38 स्थित सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (SPCA) पहुंचे। उन्होंने यहां कुत्तों, बिल्लियों और पक्षियों के लिए बनाए गए वार्डों की स्वच्छता देखी और बीमार पशुओं के इलाज की जानकारी ली। शहर में आक्रामक कुत्तों की बढ़ती समस्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि इनके प्रबंधन के लिए एक ठोस 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) तैयार किया जाए।

इस अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव वी. पी. सिंह, चिकित्सा शिक्षा सचिव मंदीप सिंह बराड़, नगर निगम आयुक्त अमित कुमार और सामाजिक कल्याण सचिव अनुराधा चगती सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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