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प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा की याद में कार्यक्रम आयोजित, वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और जीवन दर्शन पर की चर्चा 

ब्रह्मलीन प्रोफेसर हिम्मत सिंह सिन्हा की ज्ञान-यात्रा का सातवां पड़ाव सिंगापुर में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन आर्य समाज सिंगापुर, डीएवी हिंदी स्कूल और विश्व हिंदी सेवा संस्थान...

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ब्रह्मलीन प्रोफेसर हिम्मत सिंह सिन्हा की ज्ञान-यात्रा का सातवां पड़ाव सिंगापुर में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन आर्य समाज सिंगापुर, डीएवी हिंदी स्कूल और विश्व हिंदी सेवा संस्थान सिंगापुर द्वारा लोटस ब्लूम पब्लिकेशन के सहयोग से किया गया।

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कार्यक्रम में आर्य समाज सिंगापुर के ट्रस्टी एवं वाइस प्रेसिडेंट ओमप्रकाश रॉय तथा संस्था की अध्यक्षा अनुसूया साहू की विशेष भूमिका रही। इस अवसर पर करीब 15 स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भारतीय संस्कृति की झलक पेश करते हुए विभिन्न पारंपरिक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं।

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कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा के व्यक्तित्व और उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने बताया कि प्रो. सिन्हा न केवल एक महान दार्शनिक थे, बल्कि उन्होंने गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी संन्यास की भावना को आत्मसात किया। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष और डीन के रूप में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती भुवनेश्वरी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रो. सिन्हा के अनुसार केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को जीवन मूल्यों, संस्कारों और अच्छे साहित्य से भी जोड़ना आवश्यक है।

करीब चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। साथ ही दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर आर्य समाज सिंगापुर के आचार्य विजय व्यास ने प्रो. सिन्हा के साथ बिताए अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि प्रो. सिन्हा का सान्निध्य उनके जीवन की अमूल्य धरोहर है।

कार्यक्रम के अंत में जानकारी दी गई कि ज्ञान-यात्रा का अगला पड़ाव मलेशिया में होगा, जबकि अप्रैल माह में यह यात्रा जापान पहुंचेगी।

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