सार्वजनिक अस्पतालों की व्यवस्था को आमतौर पर लोग बाहर से देखते हैं, लेकिन इस बार हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 800 स्कूली विद्यार्थियों ने इसे भीतर से समझा। 7 से 13 फरवरी 2026 के बीच पीजीआई में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम के तहत चार चरणों में विद्यार्थियों को अस्पताल की कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया। इस पूरी अवधि में मरीज सेवाएं बिना किसी व्यवधान के जारी रहीं। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल अस्पताल दिखाना नहीं था, बल्कि युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना भी था। विद्यार्थियों को संस्थान की स्वैच्छिक सेवा पहल ‘सारथी’ के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि अंगदान, रक्तदान और नेत्रदान जैसे प्रयास समाज और स्वास्थ्य तंत्र के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं।संस्थान के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य की शुरुआत जीवनशैली से होती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, मानसिक संतुलन और अच्छी आदतें कई गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि कम उम्र में जागरूकता ही भविष्य की स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।उपनिदेशक प्रशासन पंकज राय ने बताया कि विद्यार्थियों के भ्रमण को व्यवस्थित ढंग से आयोजित किया गया, ताकि उन्हें अच्छा अनुभव मिले और मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो। विद्यार्थियों ने चयनित ओपीडी और मरीज सहायता क्षेत्रों का दौरा किया और देखा कि प्रतिदिन हजारों मरीजों की देखभाल किस तरह टीमवर्क के साथ की जाती है।शिमला के एक सरकारी विद्यालय की कक्षा 12 की छात्रा मानवी ने कहा कि इस यात्रा ने अस्पतालों के प्रति उनकी सोच बदल दी। उन्हें समझ आया कि मरीजों की सेवा में कई लोग मिलकर काम करते हैं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना कितना जरूरी है।