चंडीगढ़ में 30 हजार राशन कार्डधारक प्रक्रिया से बाहर, AAP बोली- गरीबों के साथ सीधा धोखा
चंडीगढ़ सेक्टर-39 स्थित AAP कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में कुल 83,446 राशन कार्ड हैं और इनके तहत लगभग 2.8 से 2.9 लाख लाभार्थी NFSA के अंतर्गत राशन पाने के पात्र हैं। ऐसे में राशन...
चंडीगढ़ सेक्टर-39 स्थित AAP कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष विजयपाल सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में कुल 83,446 राशन कार्ड हैं और इनके तहत लगभग 2.8 से 2.9 लाख लाभार्थी NFSA के अंतर्गत राशन पाने के पात्र हैं। ऐसे में राशन जैसी मूलभूत सुविधा को मोबाइल ऐप, डिजिटल प्रक्रिया और डिजिटल करेंसी से जोड़ना गरीब परिवारों के लिए तकनीकी, आर्थिक और दस्तावेजी परेशानी का कारण बन सकता है।
उन्होंने सवाल किया कि जिन परिवारों के पास स्मार्टफोन, इंटरनेट या डिजिटल जानकारी नहीं है, वे इस व्यवस्था का लाभ कैसे उठा पाएंगे और यदि कोई पात्र लाभार्थी ऐप डाउनलोड या डिजिटल प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता है तो क्या उसका राशन या सब्सिडी बंद हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 25,000 से अधिक लाभार्थी अपनी जानकारी जमा कर चुके हैं, 22,000 से अधिक लाभार्थियों ने एप्लिकेशन डाउनलोड किया है, जबकि करीब 30,000 राशन कार्ड धारक अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लाभार्थियों का प्रक्रिया से बाहर रहना सरकार की डिजिटल व्यवस्था की जमीनी चुनौती को दिखाता है।
आप नेताओं ने बताया कि प्रक्रिया पूरी करवाने के लिए प्रशासन की ओर से 3 जून से प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए। ये कैंप विकास नगर (मौली जागरां), मलोया, सेक्टर-25, बुरैल, कजेहड़ी, हल्लोमाजरा, खुड्डा अलीशेर, सेक्टर-32, 40, 41, 42, 56 और मनीमाजरा सहित विभिन्न स्थानों पर आयोजित किए गए। मलोया, मौली जागरां, मनीमाजरा, सेक्टर-25, बुरैल, सेक्टर-55 और 56, हल्लोमाजरा तथा पलसोरा में अभी भी बड़ी संख्या में लाभार्थियों के लंबित होने की बात सामने आई है।
हरदीप सिंह बुटेरला ने कहा कि गरीब परिवारों के लिए स्मार्टफोन, इंटरनेट और हर महीने मोबाइल रिचार्ज का अतिरिक्त खर्च उठाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि राशन कार्ड को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने के नाम पर KYC, ऐप डाउनलोड और अन्य औपचारिकताओं का बोझ बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि जिन लाभार्थियों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, उनके लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था है और यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीकी कारणों से किसी पात्र परिवार का राशन या राशन कार्ड प्रभावित न हो।
पूर्व मेयर कुलदीप कुमार ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार को जमीनी हकीकत समझनी चाहिए। बड़ी संख्या में गरीब महिलाएं, बुजुर्ग और अशिक्षित लोग स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लाभार्थियों को सहायता, प्रशिक्षण और ऑफलाइन विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है। केवल ऐप डाउनलोड करवा देना डिजिटल सशक्तिकरण नहीं है; अंतिम व्यक्ति तक उसके अधिकार का लाभ बिना परेशानी पहुंचना चाहिए।
कुलदीप कुमार ने कहा कि यदि डिजिटल करेंसी निर्धारित समय में इस्तेमाल नहीं हो पाती और उसके वापस चले जाने जैसी स्थिति बनती है तो यह गरीब लाभार्थियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सरकार को इस पूरी व्यवस्था पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
आप नेताओं ने केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से पूछा कि करीब 30,000 लंबित लाभार्थियों में से कितने लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है, कितने लोग केवल डिजिटल प्रक्रिया के कारण राशन या सब्सिडी से वंचित हो रहे हैं और स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा न रखने वाले लाभार्थियों के लिए ऑफलाइन व्यवस्था क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार यह गारंटी देगी कि केवल डिजिटल प्रक्रिया पूरी न कर पाने, KYC अथवा तकनीकी खामी के कारण किसी पात्र परिवार का राशन या राशन कार्ड बंद नहीं किया जाएगा।
आप नेताओं ने कहा कि राशन कार्ड केवल खाद्यान्न प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि कई गरीब परिवारों के लिए अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने का महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है। इसलिए किसी भी डिजिटल बदलाव के दौरान पात्र परिवारों की खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
पार्टी ने केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन से मांग की कि सभी राशन कार्ड धारकों का व्यापक सर्वे कराया जाए, स्मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता से वंचित परिवारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, KYC अथवा तकनीकी खामियों के कारण किसी पात्र परिवार का राशन कार्ड रद्द न किया जाए और राशन वितरण एवं सब्सिडी के लिए ऑफलाइन व्यवस्था जारी रखी जाए।
आप नेताओं ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यदि वास्तव में गरीबों तक राशन पहुंचाना है तो व्यवस्था सरल, पारदर्शी और लोगों की पहुंच में होनी चाहिए, न कि ऐसी तकनीकी और आर्थिक शर्तें लगाई जाएं जिनके कारण जरूरतमंद व्यक्ति अपने अधिकार से वंचित हो जाए।
उन्होंने कहा, “राशन गरीब का अधिकार है, स्मार्टफोन की सुविधा नहीं। सरकार डिजिटल व्यवस्था लागू कर सकती है, लेकिन डिजिटल प्रक्रिया पूरी न कर पाने की सजा गरीब परिवार को राशन बंद करके नहीं दी जा सकती।”

