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द ट्रिब्यून भारत के सबसे सम्मानित और विश्वसनीय समाचार पत्रों में से एक के रूप में गौरवपूर्वक खड़ा है। पिछले 145 वर्षों में इसने न सिर्फ ऐतिहासिक घटनाओं की रिपोर्टिंग की, बल्कि इतिहास को जिया भी है और औपनिवेशिक शासन से लेकर एक आत्मविश्वासी, संप्रभु लोकतंत्र तक भारत की यात्रा को निष्ठापूर्वक दर्ज किया है। स्वतंत्रता संग्राम, विभाजन की पीड़ा, युद्धों, सामाजिक परिवर्तन और तेजी से बदलते राष्ट्र की चुनौतियों के बीच, द ट्रिब्यून इस क्षेत्र और देश के लोगों के लिए एक स्थिर, विश्वसनीय और सिद्धांतनिष्ठ आवाज बना रहा है।
महान दूरदर्शी सरदार दयाल सिंह मजीठिया द्वारा स्थापित द ट्रिब्यून की परिकल्पना सेवा, सत्यनिष्ठा और ज्ञान के प्रसार को समर्पित एक सार्वजनिक संस्थान के रूप में की गई थी। उनका दृढ़ विश्वास था कि सामाजिक सुधार और लोकतांत्रिक प्रगति के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और जागरूक प्रेस अनिवार्य है। इस महान विरासत की रक्षा के लिए गठित द ट्रिब्यून ट्रस्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि समाचार पत्र वाणिज्यिक एवं राजनीतिक दबावों से स्वतंत्र रहे और पूरी तरह से जनहित, सत्य एवं संतुलन द्वारा निर्देशित हो।
द ट्रिब्यून ट्रस्ट और इसके अध्यक्ष श्री एनएन वोहरा के कुशल नेतृत्व में समाचार पत्र ने अपनी श्रेष्ठ परंपराओं को निरंतर बनाए रखा है। श्री वोहरा की विशिष्ट लोकसेवा, प्रशासनिक अनुभव एवं संस्थागत सत्यनिष्ठा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता ने द ट्रिब्यून के संस्थापक मूल्यों के संरक्षक के रूप में ट्रस्ट की भूमिका को और मजबूत किया है। उनके नेतृत्व ने बदलते समय में अखबार की विश्वसनीयता, स्वतंत्रता, प्रासंगिकता को और मजबूत किया है।
द ट्रिब्यून को विशिष्ट बनाता है उसका वस्तुनिष्ठ, निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता के प्रति अडिग समर्पण। तेज गति से चलने वाली खबरों और सूचनाओं के ओवरलोड के इस युग में, इसने लगातार संयम, सटीकता और गहराई का परिचय दिया है। इसकी रिपोर्टिंग परिपक्वता, निष्पक्षता और संतुलन को दर्शाती है, जिनके चलते इसे पीढ़ियों से पाठकों का विश्वास मिला है। द ट्रिब्यून को सही मायने में सिर्फ एक अखबार नहीं, बल्कि एक संस्था माना जाता है।
पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में और एक पुराने पाठक के नाते, मैं लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने, सूचित जनसंवाद को बढ़ावा देने एवं सार्वजनिक महत्व के मुद्दों को उजागर करने में द ट्रिब्यून के योगदान को अत्यंत महत्व देता हूं। नैतिक पत्रकारिता और निर्भीक किंतु जिम्मेदार रिपोर्टिंग के प्रति इसकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय बनी हुई है।
द ट्रिब्यून के 145वें स्थापना दिवस के अवसर पर, मैं बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़, अध्यक्ष एनएन वोहरा, संपादकीय टीम, पत्रकारों, कर्मचारियों और इस महान संस्था से जुड़े सभी लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि अपनी गौरवशाली विरासत और स्थायी आदर्शों के मार्गदर्शन में द ट्रिब्यून आने वाले वर्षों में नयी उपलब्धियां हासिल करता रहेगा तथा स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय पत्रकारिता का पथप्रदर्शक बना रहेगा।
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