Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

PMI Manufacturing: विनिर्माण क्षेत्र की अगस्त में सुस्त पड़ी रफ्तार, मांग में नरमी से पांच साल का निचला स्तर

PMI Manufacturing:  देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि मांग में नरमी के बीच उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि धीमी पड़ने से अगस्त में पांच साल के निचले स्तर 52.8 पर आ गई। मंगलवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में...

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
featured-img featured-img
सांकेतिक चित्र
Advertisement

PMI Manufacturing:  देश के विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि मांग में नरमी के बीच उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि धीमी पड़ने से अगस्त में पांच साल के निचले स्तर 52.8 पर आ गई। मंगलवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) जुलाई के 53.5 से घटकर अगस्त में 52.8 रह गया।

यह पांच साल में क्षेत्र की स्थिति में सबसे कमजोर सुधार को दर्शाता है। खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) में 50 से अधिक का अंक विस्तार को जबकि 50 से कम का स्तर संकुचन को दर्शाता है।

Advertisement

एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की 'डिलीवरी' अवधि और खरीद के भंडार जैसे मापदंडों से समग्र कारोबारी परिस्थितियों का आकलन करता है। कंपनियों ने मांग की परिस्थितियों में नरमी की जानकारी दी। इससे खरीद के स्तर और भंडार में वृद्धि धीमी हुई तथा रोजगार में मामूली गिरावट आई।

Advertisement

एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा, '' भारत की विनिर्माण वृद्धि अगस्त में घटकर 52.8 रह गई और इसमें लगातार तीसरे महीने गिरावट आई। उत्पादन सूचकांक अगस्त 2021 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि उत्पादन में अब भी वृद्धि हो रही है, लेकिन इसकी गति काफी धीमी हो गई है।''

नए ऑर्डर में वृद्धि जारी रही, हालांकि इसकी गति पांच साल में सबसे कमजोर रही। सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने वृद्धि की धीमी गति के लिए बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और कुछ उत्पादों की कमजोर मांग को जिम्मेदार ठहराया। इस बीच, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, चीन, स्पेन, थाईलैंड और अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों से मांग के चलते निर्यात बिक्री में वृद्धि जारी रही।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में वृद्धि की दर जुलाई की तुलना में धीमी रही। रोजगार के मोर्चे पर, विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार ढाई साल में पहली बार घटा, हालांकि गिरावट की दर मामूली रही। जिन कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या घटाई, उन्होंने मुख्य रूप से कारोबार की कम जरूरतों को इसका कारण बताया।

भंडारी ने कहा, ''अगस्त में रोजगार में मामूली कमी आई। दो साल से अधिक समय तक रोजगार में वृद्धि के बाद यह पहली गिरावट है। इस बीच, लागत पर दबाव कम होता रहा और विनिर्माताओं ने बिक्री कीमतों में अपेक्षाकृत कम वृद्धि की।'' कीमतों के मोर्चे पर विनिर्माताओं को इस्पात समेत कच्चे माल और परिवहन की लागत बढ़ने का सामना करना पड़ा।

हालांकि, कुल मुद्रास्फीति की दर मध्यम रही और छह महीनों में सबसे कमजोर रही। लागत का दबाव कम होने से कंपनियां बिक्री कीमतों में वृद्धि को सीमित कर सकीं। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन कीमतों में मुद्रास्फीति मामूली रूप से बढ़ी, लेकिन 45 महीनों के निचले स्तर पर रही और अपने दीर्घकालिक औसत से नीचे बनी रही। मौजूदा परिस्थितियों में नरमी के बावजूद कारोबारी विश्वास तीन महीने के उच्च स्तर पर बना है।

सर्वेक्षण में शामिल करीब 16 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अगले 12 महीनों में उत्पादन बढ़ने का अनुमान जताया, जबकि बाकी ने मौजूदा स्तर में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद जताई। एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल करीब 400 विनिर्माताओं के एक समूह के खरीद प्रबंधकों को भेजी गई प्रश्नावलियों के जवाब के आधार पर तैयार करता है। इस समूह का वर्गीकरण सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान के आधार पर विस्तृत क्षेत्र और कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या के अनुसार किया गया है।

Advertisement
×