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Makar Sankranti : मकर संक्रांति पर क्यों बनाई जाती है खिचड़ी, आप भी नहीं जानते होंंगे भगवान विष्णु से जुड़ी पौराणिक कथा

उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे 'खिचड़ी पर्व' के रूप में मनाया जाता है

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Makar Sankranti : मकर संक्रांति भारत के बेहद खास पर्वों में से एक है क्योंकि इसे सूर्य के उत्तरायण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसके बाद से दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। देश के कई जगहों पर इस दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे 'खिचड़ी पर्व' के रूप में मनाया जाता है। लोग अपने रिश्तेदारों के घर खिचड़ी भेजते हैं और आपसी संबंधों को मजबूत करते हैं। मगर, क्या आप जानते हैं कि इस दिन खिचड़ी क्यों बनाई और खाई जाती है?

भगवान विष्णु से जुड़ा कनेक्शन

मान्यता है कि मकर संक्रांति पर भगवान विष्णु ने असुरों का संहार कर देवताओं को विजय दिलाई थी और उनके सिरों को मंदराचल पर्वत के नीचे दबा दिया था। इस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने खिचड़ी का भोग चढ़ाया इसलिए कहा जाता है कि इस दिन खिचड़ी बनाने और दान करने से भगवान प्रसन्न होते हैं।

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बाबा गोरखनाथ से भी जुड़ी परंपरा

उत्तर प्रदेश में यह भी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन बाबा गोरखनाथ ने गरीबों और साधुओं को खिचड़ी खिलाई थी। तभी से गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में इस दिन “खिचड़ी महोत्सव” मनाया जाता है और मंदिरों में विशाल भंडारे आयोजित किए जाते हैं।

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महाभारत काल से जुड़ी पौराणिक कथा

एक प्रचलित कथा के अनुसार, महाभारत काल में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की थी। मकर संक्रांति पर उन्होंने देह त्याग किया, जिससे यह दिन और भी पवित्र माना गया। खिचड़ी को सादा, सात्त्विक और शरीर को पोषण देने वाला भोजन माना जाता है, इसलिए इस पावन तिथि पर इसका सेवन शुभ समझा गया।

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