संत ज्ञानेश्वर एक बाग के पास से गुजर रहे थे। माली को पौधों में पानी देते देखकर उन्होंने शिष्यों से कहा, ‘क्या तुम इस पानी की विशेषता जानते हो?’ शिष्यों ने अनभिज्ञता जताई। संत बोले, ‘यह पानी अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि माली की इच्छा से काम करता है। वह जहां बहाया जाता है, वहीं चला जाता है। हमें भी अपना जीवन पानी की तरह बनाना चाहिए और अपनी इच्छाएं व समस्याएं ईश्वर रूपी माली को सौंप देनी चाहिए।’
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