शिकागो प्रवास के दौरान रक्षाबंधन का पर्व आया। स्वामी विवेकानंद जी जिस परिवार के यहां ठहरे हुए थे, उस परिवार की अमेरिकी महिला स्वामी जी के उदात्त विचारों से बेहद प्रभावित थी। उन्होंने भारतीय परंपरा और रक्षाबंधन का महत्व सुना हुआ था। वह अमेरिकी महिला एक रक्षा सूत्र लेकर आई और स्वामी विवेकानंद की कलाई पर बांधते हुई बोली, ‘स्वामी जी, भारतीय संस्कृति में यह धागा बहन अपने भाई की कलाई पर बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। आज मैं यह रक्षा सूत्र आपको बांध कर भारतीय संस्कृति की इस परंपरा को जीना चाहती हूं।’ स्वामी जी ने प्रसन्न होकर अमेरिकी महिला से धागा बंधवाया और बोले, ‘आज आपने मेरी कलाई पर धागा बांध यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति जहां-जहां भी जाएगी, अपने पावन धागे में सबको बांधती जाएगी। हमारी भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के अलावा जहां भी पवित्रता, नि:स्वार्थ प्रेम और सम्मान है वहां सबको यह सूत्र बांधा जाता है और इससे हर रिश्ता अटूट बन जाता है। एक संन्यासी के रूप में मैं इस धागे को बंधवा कर आपको वचन देता हूं कि विश्व की हर नारी के सम्मान की रक्षा करना ही मेरा परम कर्तव्य होगा।’ यह सुनकर अमेरिकी महिला की आंखों में आंसू भर आए और इस प्रकार रक्षा बंधन के दिन उनका स्वामी जी से एक अटूट रिश्ता बन गया।
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