सत्य की ताकत
यात्रियों का एक काफिला रेगिस्तान से गुजर रहा था। अचानक लुटेरों के गिरोह ने घेर लिया। प्रत्येक यात्री की तलाशी लेकर रुपये तथा अन्य सामान छीन लिया गया। एक बारह वर्षीय लड़के के पास से कुछ नहीं मिला। लुटेरों के...
यात्रियों का एक काफिला रेगिस्तान से गुजर रहा था। अचानक लुटेरों के गिरोह ने घेर लिया। प्रत्येक यात्री की तलाशी लेकर रुपये तथा अन्य सामान छीन लिया गया। एक बारह वर्षीय लड़के के पास से कुछ नहीं मिला। लुटेरों के सरदार ने पूछा, ‘तेरे पास से कुछ नहीं मिला, क्या तू अनाथ तो नहीं है?' किशोर ने जवाब दिया, ‘मैं अपनी बीमार बहन की खिदमत करने जा रहा हूं। मेरी मां ने सोने की पांच अशर्फियां मेरे लंगोट में छिपा दी थीं, जो मेरे पास हैं।’ लुटेरों के सरदार ने उससे पूछा, ‘जब मां ने अशर्फियां छिपाकर रख दी थीं तो तूने हमें क्यों बताया कि अशर्फियां छिपा रखी हैं।’ किशोर ने बताया, ‘मां ने यह भी प्रेरणा दी थी कि जीवन में कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। आपने पूछा तो मैं झूठ कैसे बोलता?’ बालक की सत्यनिष्ठा ने डाकू सरदार का हृदय बदल दिया। उसने तमाम यात्रियों से लूटा हुआ सामान वापस कर दिया। सरदार ने कहा, ‘बेटा मैं भी आज से सत्य का पालन करने का संकल्प लेता हूं। अब लूटपाट नहीं करूंगा।’ यह सत्यनिष्ठ बालक आगे चलकर ‘खलीफा अमीन’ के नाम से विख्यात हुआ।

