Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
search-icon-img
Advertisement

स्वाभाविक राह

एकदा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

एक बार एक शिष्य अपने गुरु के पास आया और बोला, ‘गुरुदेव, मैं हमेशा दूसरों से तुलना करता हू्ं। कोई मुझसे तेज़ है, कोई मुझसे बुद्धिमान। मैं कब आगे बढ़ूंगा?’ गुरु उसे जंगल में ले गए। वहां दो पेड़ थे—एक लंबा, सीधा साल का पेड़ और उसके पास छोटा‑सा आम का पौधा। शिष्य बोला, ‘साल का पेड़ कितना महान है, और यह आम का पौधा कितना छोटा!’ गुरु ने कहा, ‘साल का पेड़ सौ साल में इतना बड़ा हुआ है, और यह आम का पौधा पांच साल में फल देने लगेगा। दोनों का मार्ग अलग है, पर दोनों प्रकृति के लिए आवश्यक हैं।’ फिर गुरु बोले, ‘यदि आम का पौधा साल बनने की कोशिश करे, तो वह फल देना भूल जाएगा। और साल अगर आम बनने लगे, तो अपनी छाया खो देगा। महानता तुलना में नहीं, अपने स्वभाव को पहचानने में है।’ शिष्य की आंखों में प्रकाश आ गया। उसने उसी दिन से दूसरों से नहीं, अपने कल से आगे बढ़ने का संकल्प लिया कि दूसरों की राह देखकर मत ठहरो, अपने स्वभाव की राह पर चलो—वहीं तुम्हारी सच्ची महानता है।

Advertisement
Advertisement
×