एकदा

अध्यात्म के मायने

अध्यात्म के मायने

एक बार रामकृष्ण परमहंस गंगा किनारे बैठे थे। एक व्यक्ति उनके पास आकर वार्तालाप करने लगा। वह कुछ यौगिक क्रियायें जैसे शरीर को हल्का करना, पानी के ऊपर चलना जानता था। परमहंस जी को अपमानित करने के उद्देश्य से उसने कहा- सुना है आप बहुत ऊंची आध्यात्मिक स्थिति में प्रतिष्ठित हैं। क्या आप मेरे साथ गंगा में पानी के ऊपर चलकर गंगा पार कर सकते हैं? परमहंस जी हंसे और कहने लगे- मैं तो पांच पैसे में गंगा पार कर लेता हूं, पानी पर चलने की कभी जरूरत ही नहीं पड़ी। परमहंस जी ने पूछा-पानी के ऊपर चलना सीखने में तुम्हें कितना समय लगा? उस व्यक्ति ने कहा- यही कोई अट्ठारह बरस। परमहंस जी हंसे और कहने लगे-पांच पैसे के काम को अट्ठारह बरस में सीखने को मैं मूर्खता मानता हूं, अध्यात्म नहीं। मनुष्य का जन्म ईश्वर को जानने के लिए होता है, पानी पर चलकर चमत्कार दिखाने के लिए नहीं।

प्रस्तुति : मधुसूदन शर्मा

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