एक बार वृन्दावन के महान संगीतकार संन्यासी स्वामी हरिदास जी अपनी शिष्य-मंडली के साथ ग्वालियर के बेहट गांव के इमली के बाग़ में होकर गुज़र रहे थे। उसी समय बालक 'तन्ना' ने एक पेड़ की आड़ में छिपकर शेर जैसी दहाड़ लगाई। डर के मारे सब लोगों के दम फूल गए। स्वामी जी को उस स्थान पर शेर के रहने का विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत खोज की। उन्होंने बालक को दहाड़ते हुए पाया। बालक के इस क़ौतुक पर स्वामी जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने जब अन्य पशु-पक्षियों की आवाज़ें भी बालक से सुनीं, तो वे मुग्ध हो गए और उसके पिताजी से बालक को संगीत-शिक्षा देने के लिए मांगकर अपने साथ वृन्दावन ले आए। गुरु की कृपा से दस वर्षों की अवधि में ही बालक तन्ना एक धुरंधर गायक बन गया और यहीं से उसका नाम 'तन्ना' की बजाय 'तानसेन' पड़ गया।
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