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धुन से कामयाबी

एकदा

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1890 के दशक में किंग सी. जीलेट नामक एक व्यक्ति एक बोतल के ढक्कन बनाने वाली कंपनी में सेल्समैन का काम करते थे। एक दिन उनके मालिक विलियम पेंटर बोले, ‘किंग, तुम अधिकतर नई-नई चीजों के बारे में सोचते रहते हो। कुछ ऐसा सोचो न कि तुम्हारा नाम पूरी दुनिया में हो जाए।’ मालिक की बात जीलेट के मन-मस्तिष्क में बस गई। एक दिन वे अपने पुराने उस्तरे से शेव बना रहे थे। उस्तरा भोथरा था। उसे बार-बार चमड़े पर रगड़कर धार बनानी पड़ रही थी। तब उनके दिमाग में विचार आया कि शेव बनाने के लिए ऐसा कोई पतला और छोटा-सा उपकरण नहीं बन सकता, जिसे प्रयोग करके फेंक दिया जाए। वे अपने इस विचार को लेकर धातुकर्म विशेषज्ञों के पास गए। उन्होंने उनके विचार का मजाक उड़ाया और कहा कि, ‘इतनी पतली, सस्ती और धारदार स्टील ब्लेड बनाना असंभव है, जिसे प्रयोग करके फेंक दिया जाए।’ जीलेट ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने साथ विलियम निकरसन नामक वैज्ञानिक को लिया और काम में लग गए। वे कई बार असफल रहे, मगर आखिर उन्होंने डिस्पोजेबल सेफ्टी रेज़र का आविष्कार कर दिया। कुछ ही समय में उनके द्वारा बनाए गए ब्लेडों की पूरे विश्व में धूम मच गई और किंग सी. जीलेट प्रसिद्ध हो गए।

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