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Shakambhari Navratri 2025: शाकंभरी नवरात्र आज से, जानें इसकी पूजा विधि एवं मंत्र

Shakambhari Navratri 2025:शाकंभरी नवरात्र हिंदू धर्म में विशेष आस्था और महत्व का पर्व है। यह आज से शुरू हो रहा है। यह देवी दुर्गा के अन्नपूर्णा स्वरूप मां शाकंभरी को समर्पित होता है, जिन्हें फल, फूल, अन्न और सब्जियों की...

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Shakambhari Navratri 2025:शाकंभरी नवरात्र हिंदू धर्म में विशेष आस्था और महत्व का पर्व है। यह आज से शुरू हो रहा है। यह देवी दुर्गा के अन्नपूर्णा स्वरूप मां शाकंभरी को समर्पित होता है, जिन्हें फल, फूल, अन्न और सब्जियों की देवी माना जाता है।

पंडित अनिल शास्त्री के मुताबिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय धरती पर भीषण अकाल पड़ा था। चारों ओर अन्न का अभाव और हाहाकार मचा हुआ था। तब मां दुर्गा ने शाकंभरी रूप में अवतार लेकर धरती को फिर से हराभरा किया और जीवों की रक्षा की। इसी कारण उन्हें “शाकंभरी” कहा गया, अर्थात शाक (सब्जियों) से जीवन का पोषण करने वाली देवी।

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शाकंभरी नवरात्र का आयोजन पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तिथि तक किया जाता है। वर्ष 2025 में शाकंभरी नवरात्र 28 दिसंबर 2025 से प्रारंभ होकर 03 जनवरी 2026 को समाप्त होगी। इस वर्ष यह नवरात्र 9 के बजाय 8 दिनों तक मनाई जाएगी।

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पूजा विधि के अंतर्गत नवरात्र के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है। पूजा स्थल पर मां शाकंभरी की प्रतिमा स्थापित करें या लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर रखें और उन्हें लाल चुनरी व सोलह श्रृंगार अर्पित करें। मां को फल, सब्जी, अनाज और मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के दौरान “ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भगवति शाकंभरी देव्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ कर आरती करें।

इस नवरात्र में गरीबों और जरूरतमंदों को सब्जी, फल व अनाज का दान विशेष फलदायी माना जाता है। अष्टमी और पूर्णिमा तिथि को हवन किया जाता है तथा पूर्णिमा के दिन व्रत का समापन होता है। इस दौरान तामसिक वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। मां शाकंभरी की कृपा से अन्न-धन की वृद्धि और जीवन में समृद्धि आती है।

Panchang 28 December 2025: राष्ट्रीय तिथि पौष 07

शक संवत 1947

मास / पक्ष / तिथि पौष मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी

वार रविवार

विक्रम संवत 2082

सौर मास पौष मास प्रविष्टे 14

अंग्रेजी तिथि 28 दिसंबर 2025 ई.

सूर्य स्थिति उत्तरायण

गोल दक्षिण गोल

ऋतु शिशिर ऋतु

राहुकाल सायं 04:30 बजे से 06:00 बजे तक

तिथि अष्टमी दोपहर 12:10 बजे तक, उपरांत नवमी

नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद प्रातः 08:43 बजे तक, उपरांत रेवती

योग वरीयान प्रातः 10:13 बजे तक, उपरांत परिधि

करण वब करण दोपहर 12:10 बजे तक, उपरांत कौलव

विजय मुहूर्त दोपहर 02:06 बजे से 02:47 बजे तक

निशीथ काल रात्रि 11:56 बजे से 12:50 बजे तक

गोधूलि बेला सायं 05:30 बजे से 05:58 बजे तक

चन्द्र राशि मीन (दिन-रात संचार)

डिस्कलेमर: यह लेख धार्मिक आस्था व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribuneonline.com इसकी पुष्टि नहीं करता। जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें।

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