एकदा

भावना से दृष्टि

भावना से दृष्टि

एक बार मदर टेरेसा को एक सभा में उद‍्बोधन के लिये आमंत्रित किया गया। वहां उनके सचिव सहित पूरा स्टाफ उनके साथ था। आयोजन में सारी व्यवस्था चाकचौबंद और बेहतरीन थी। मदर टेरेसा ने भीड़ में एक परेशान महिला को देखा और बाद में पास बुलाकर उसका हालचाल पूछा। वह महिला वास्तव में बीमार और जरूरतमंद थी। मदर टेरेसा ने उसकी चिकित्सा करवाई और उसको रोजगार दिलाने में सहायता प्रदान की। सब भौचक्के थे कि मदर ने इतनी भीड़ में एक दुखी को पहचान लिया। मदर टेरेसा का कहना था कि नेत्र हमें केवल दृष्टि प्रदान करते हैं, परन्तु आप कब किसमें क्या देखते हैं, यह आपकी भावनाओं पर निर्भर करता है।                                     प्रस्तुति : पूनम पांडे

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