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मानवता का सम्मान

एकदा

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नेपोलियन बोनापार्ट अपने विजय अभियानों के दौरान जीते हुए राज्यों को, विजित राजाओं से उनके वफादार रहने का आश्वासन प्राप्त करने के बाद उन्हें पुनः लौटाया करता था। एक बार, ऐसे ही एक हारे हुए राजा को नेपोलियन ने उसका राज्य वापस दे दिया, लेकिन वह शत्रुओं से जा मिला और नेपोलियन के खिलाफ विद्रोह कर दिया। नेपोलियन ने क्रोधित होकर उसकी राजधानी पर आक्रमण कर दिया। नेपोलियन की विशाल सेना से भयभीत होकर राजा अपने परिवार के साथ जंगलों में भाग गया, लेकिन जल्दबाजी में एक बीमार राजकुमार महल में ही छूट गया। नेपोलियन ने राजमहल को तोप से उड़ाने का आदेश दिया। तोपों की गरज के बीच, बीमार राजकुमार इधर-उधर दौड़ने लगा। किसी तरह सिपाहियों ने यह सूचना नेपोलियन तक पहुंचाई। यह सुनते ही नेपोलियन ने तुरंत गोलाबारी रुकवा दी। तोपें शांत होते ही सेनापति नेपोलियन के पास आया और बोला, ‘यह आपने क्या किया? सारे सैनिकों का उत्साह भंग हो गया है और सैनिकों के नियमों का भी उल्लंघन हुआ है।’ यह सुनकर नेपोलियन ने उत्तर दिया, ‘मेरे भाई, मैं मानता हूं कि सैनिकों के नियमों का उल्लंघन हुआ है, लेकिन साथ ही मानवता का अपमान भी हुआ होता, और यह हम वीरों को शोभा नहीं देता।’

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