जीवन की प्रासंगिकता : The Dainik Tribune

एकदा

जीवन की प्रासंगिकता

जीवन की प्रासंगिकता

एक टूरिस्ट अपने गाइड के साथ कैलिफोर्निया के कोस्ट रेड वुड के पेड़ों से आच्छादित जंगलों में घूम रहा था। कुछ पेड़ 35 मंजिला इमारतों से भी ऊंचे थे। यही नहीं कोस्ट रेडवुड 2,000 साल से अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। यह सब देखकर वह हैरान था। टूरिस्ट ने अपने गाइड से पूछा, ‘इतने ऊंचे पेड़ को थामने के लिए तो इसकी जड़ें बहुत गहराई तक होंगी।’ गाइड ने बताया, ‘नहीं, रेड वुड के पेड़ के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं है। रेडवुड पेड़ की जड़ें बहुत उथली होती हैं, अक्सर केवल पांच या छह फुट गहरी होती हैं।’ ‘फिर आंधी-तूफान में ये इतनी मज़बूती के साथ कैसे खड़े रहते हैं और इतने अधिक दीर्घजीवी होते हैं।’ टूरिस्ट ने सवाल किया। गाइड ने बताया, ‘पेड़ की उथली जड़ें आसपास के दूसरे पेड़ों की जड़ों की ओर बढ़ती हैं और एक-दूसरे से गुंथ जाती हैं। आपस में जुड़कर वे इतनी शक्तिशाली हो जाती हैं कि प्राकृतिक शक्तियां आंधी-तूफान, भीषण बाढ़ भी पेड़ों का कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इस तरह रेड वुड पेड़ समूह में रहते हैं और जड़ों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़कर शक्तिशाली बने रहते हैं।’ टूरिस्ट थोड़ा दार्शनिक हो गया और कहने लगा, ‘यह जीने का एक मॉडल है, जिसे हम रेड वुड पेड़ से सीख सकते हैं। एक-दूसरे के विकास में सहयोग करते हुए साथ-साथ रहना। पारस्परिक प्रेम के साथ ही जीवन की प्रासंगिकता है।’

प्रस्तुति : मधुसूदन शर्मा

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें

शहर

View All